स्थानीय पावर हाउस के मंझनपुर फीडर से जुड़े 36 गांवों के उपभोक्ता बिजली संकट के दौर से गुजर रहे हैं। पावर हाउस में तो बिजली रहती है पर लाइन में फाल्ट के चलते ग्रामीणों को आपूर्ति नहीं मिल पाती। बाधित चल रही विद्युत आपूर्ति को लेकर गांव के उपभोक्ताओं का बुरा हाल है। वहीं समस्या को दूर करने वाले ज्यादातर लाइनमैन बीमारी का बहाना कर मौके पर जाने से बच जाते हैं।
सराय अकिल पावर हाउस के मंझनपुर फीडर की लाइन लगभग 25 किलोमीटर लंबी है। यह लाइन बाग बगीचों से होकर गांवों को पहुंचाई गई है। देखरेख के अभाव में लाइन की तारों को पेड़ों की डालियां छू रही हैं। बारिश के दिनों में लाइन म्योहर गांव के बाद जैसे ही आगे बढ़ती है पूरी तरह से फाल्ट की चपेट में आ जाती है। इसके चलते पावर हाउस से मंझनपुर फीडर की आपूर्ति लगाते ही ब्रेक डाउन हो जाती है।
जब इसकी शिकायत की जाती है तो ज्यादातर लाइनमैन अपनी बिमारी का बहाना कर देते हैं। कुछ मौके पर प्राइवेट लोगों को भेजकर कोरम पूरा कर देते हैं। शाम होने के बाद पावर हाउस से एक-दो बार आपूर्ति चालू की जाती है। लेकिन फाल्ट ठीक न होने की वजह से ब्रेकडाउन बरकरार रहता है। जब उपभोक्ता लाइन लगाने की बात कहते हैं तो पावर हाउस के जिम्मेदार फाल्ट होने की बात कहकर फोन काट देते हैं। 20 दिन से मंझनपुर फीडर में चली आ रही इस समस्या से म्योहर, म्योहरिया, इच्छना, रानीपुर, शुकुवारा, बटबंधुरी आदि गांवों के उपभोक्ता परेशान हो चुके हैं।
फाल्ट, डिस्क, तार टूटना प्रतिदिन की समस्या
स्थानीय पावर हाउस के मंझनपुर फीडर में आपूर्ति की समस्या 20 दिन से लगातार चली आ रही है। कभी जर्जर तार टूटकर गिर जाती है तो कभी डिस्क और इंसुलेटर पंचर हो जाते हैं। इन खामियों को ठीक कराने के लिए जेई द्वारा प्रयास कराया जाता है तो भी आपूर्ति नहीं चल पाती। जब जेई द्वारा लाइनमैन से पूछतांछ की जाती है तो वह बगैर कहीं गए फाल्ट जल्द ठीक करने की बात कह देते हैं।
मंझनपुर फीडर की लाइन में डिस्क, इंसुलेटर की समस्या अधिक है। इसके चलते लाइन ब्रेक डाउन हो जाती है। इन सामानों की मांग की गई है। जल्द ही सुधार किया जाएगा।
सौरभ मौर्य, जेई सराय अकिल
आधुनिक युग में लालटेन युग भारी
पइंसा क्षेत्र के चार गांवों में आजादी के 70 साल गुजरने के बावजूद ग्रामीण लालटेन ओर ढिबरी युग में जी रहे हैं। अब तक विद्युतीकरण नहीं कराए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के शिकार इन गांव के लोगों तक विकास की रोशनी नहीं पहुंच सकी है।
विकास खंड सिराथू के पती का पुरवा, मोगला, बिगिनियापुर और हिसामबाद के ग्रामीणों का कहना है कि 70 साल से वह लोग गांव मेें बल्ब की रोशनी देखने के लिए तरस रहे हैं। बल्ब की रोशनी का इंतजार इतना लंबा था कि बल्ब के युग का अंत हो गया। उसकी जगह एलईडी ने ले ली। फिर भी उनके गांव में विद्युतीकरण नहीं हो सका। चुनाव के मौके पर जनप्रतिनिधि आते हैं। वह बड़े-बड़े वादे कर चले जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि लौट कर नहीं आते हैं।
बताते हैं कि सिराथू सीट पर हुए उप चुनाव में हिसामबाद के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार कर हड़कंप मचा दिया था। सकते में आए जिले के आला अधिकारियों ने एक माह में विद्युतीकरण कराए जाने का अश्वासन देकर अपना काम निकाल लिया था। चुनाव होने के बाद किसी ने इस ओर देखना तक उचित नहीं समझा। क्षेत्र के पप्पू सिंह, उदित नारायण, अशोक कुमार, शत्रुघ्न प्रसाद, हनुमान प्रसाद, राम प्रसाद आदि का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजना उनके लिए बेमानी है।