पिपरी कोतवाली के हरदरमऊ गांव के समीप 16 साल पहले दिन-दहाड़े ट्रैक्टर चालक शिवदास की गोली व बम मारकर हत्या करने के दोषी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 30 हजार रुपया जुर्माना अदा करने का भी आदेश दिया है। कौशाम्बी कोतवाली के जाठी गांव निवासी शिवदास अनुसूचित जाति के थे। वह एक ईंट भट्ठे में ट्रैक्टर चलाते थे। शिवदास के भतीजे श्रीनाथ ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था कि 19 जनवरी 2007 को उसका चाचा शिवदास ट्रैक्टर पर मजदूरों को लेकर ईंट भट्ठा जा रहा था। पिपरी कोतवाली के हरदरमऊ गांव के समीप काले रंग की स्कार्पियों से आए जाठी गांव के बिल्ला सिंह उर्फ धर्म सिंह ने अपने साथी पप्पू के साथ मिलकर ओवरटेक करते हुए शिवदास को ट्रैक्टर से खींच लिया। इसके बाद गोली व बम मारकर उनकी हत्या कर दी। श्रीनाथ की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। यह मुकदमा अपर जिला जज चित्रा शर्मा की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन की तरफ से मुकदमे की पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक धर्मेंद्र मौर्या ने आठ लोगों की गवाही कराते हुए दोषियों को सख्त सजा दिए जाने की मांग की। कोर्ट ने बिल्ला उर्फ धर्म सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साक्ष्य के अभाव में बिल्ला के साथ रहे पप्पू को दोष मुक्त कर दिया गया है।
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गैर इरादतन हत्या के दोषी को सात साल की कैद
- फूफा के घर दुकान पर हुए झगड़े के दौरान सगे भाइयों को गया था पीटा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। फूफा की दुकान में बीड़ी खरीदने को लेकर हुए विवाद में बीच-बचाव करने पहुंचे सगे भाइयों को जमकर पीटा गया था। पिटाई में जख्मी एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। घटना में पिता-पुत्रों सहित तीन लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कराया गया था। जिसमें मुकदमे के विचारण के दौरान हमलावर पिता व उसके एक बेटे की मौत हो चुकी है। जिंदा बचे तीसरे आरोपी को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई है।
करारी कोतवाली के हिसामपुर निवासी बहोरेलाल का कहना ने कोखराज कोतवाली में अपने भाई जगदीश की गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कराया था। बहोरे लाल का कहा था कि उसकी बुआ कोखराज कोतवाली के नौढि़या में ब्याही है। फूफा बुद्दन के यहां तीन अक्तूबर 2003 को दावत थी। दावत में बहोरेलाल व उसका भाई जगदीश गए थे। फूफा ने घर में छोटी की किराने की दुकान खोल रखा था। रात 10 बजे नौढि़या का फूलचंद्र बीडी लेने आया। रात ज्यादा होने के कारण फूफा ने समान देने से मना कर दिया। इसके बाद फूलचंद्र अपने भाई लल्लन व पिता मोतीलाल के साथ पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। जगदीश ने विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडे से उसे जमकर पीटा। इलाज के दौरान जगदीश की मौत हो गई। मामले में बहोरेलाल की तहरीर पर पुलिस ने पिता-पुत्रों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमा अपर जिजा जज (प्रथम) राकेश कुमार की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार ने मुकदमे की पैरवी की। मुकरने के विचारण के दौरान अभियुक्त मोतीलाल व लल्लन की मौत हो चुकी है। कोर्ट ने फूलचंद्र को घटना का दोषी करार देते हुए सात साल की सजा की सुनाया है। इसके अलावा दोषी को 10 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया गया है।