लोकसभा चुनाव प्रत्याशी अपनी जीत के लिए कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते हैं। इसके लिए वह दिन-रात एक किए हुए हैं। इसके साथ ही चुनाव में विधायकों की भी अग्निपरीक्षा होगी। दरअसल मौजूदा समय में जनपद की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायकों का कब्जा है। ऐसे में कहीं न कहीं उनकी साख पर सवाल ना उठे इसलिए वह भी अपने विधानसभा सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जुटे हैं।
कौशाम्बी संसदीय सीट में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें प्रतापगढ़ जनपद की कुंडा और बाबागंज तथा कौशाम्बी जिले की मंझनपुर, सिराथू और चायल शामिल हैं। प्रतापगढ़ की दोनों सीटें जनसत्ता दल के संस्थापक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया के प्रभाव वाली मानी जाती हैं।
इनमें कुंडा से वह खुद विधायक हैं। जबकि बाबगज से उनके करीबी विनोद सरोज विधायक हैं। दूसरी तरफ कौशाम्बी जिले की तीनों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इसलिए लोकसभा चुनाव पार्टी के लिए अहम है। पार्टी ने इस सीट से अपने निवर्तमान सांसद विनोद सोनकर को दोबारा चुनावी समर में उतारकर भरोसा जताया है। लिहाजा पांच साल के दौरान प्रत्याशी द्वारा किया गया कार्य चुनाव में महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही पार्टी के कब्जे वाली विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रदर्शन पर निगाह होगी। यह चुनाव एक तरह से भाजपा विधायकों के लिए अगिभन परीक्षा भी होगी। विधायकों को साख बचाने के लिए उन्हें खुद के चुनाव में मिले मतों से अधिक वोट सांसद प्रत्याशी को दिलाने होंगे। यही मत जनता के बीच विधायकों की लोकप्रियता का पैमाना होंगे। कम वोट मिलने पर साफ हो जाएगा कि वह इलाकाई जनता की कसौटी पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं।