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पहली हार से सीखा दांव-पेच : चार साल से जिला चैंपियन, 25 दंगल मुकाबलों में 24 जीते

Tue, 13 Oct 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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दंगल विजेता राजेश पहलवान को गदा से सम्मानित करते नेता जितेंद्र सोनकर। स्रोत: आयोजक
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फोटो- 44
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:: पिता के अखाड़े की परंपरा को आगे बढ़ा रहे टेवां के राजेश पांडेय

शिवम केशरी
मंझनपुर। पहली कुश्ती में मिली हार से सबक लेकर आगे बढ़े टेवां निवासी राजेश पांडेय आज जिले के प्रमुख पहलवानों में शामिल हैं। लगातार चार साल से जिला चैंपियन बन रहे राजेश ने इस वर्ष जिले में आयोजित 25 दंगलों में से 24 में जीत दर्ज की। चित्रकूट, बांदा और प्रयागराज के कई इनामी दंगलों में भी उन्होंने प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी दी। गांव के अखाड़े से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरे पहलवानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

राजेश पांडेय के पिता अरुण पांडेय अखाड़ा चलाते थे। ऐसे में बचपन से ही राजेश की रुचि कुश्ती में हो गई। बीए तक पढ़ाई करने के बाद करीब आठ साल पहले उन्होंने नियमित रूप से दांव-पेच सीखना शुरू किया। पिता के निधन के बाद उन्होंने अखाड़े की परंपरा को आगे बढ़ाने का फैसला किया। आज उनके अखाड़े में जिले के अलावा संभल, मेरठ और उज्जैन के पहलवान भी अभ्यास करने आते हैं।
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मेहनत से बनाई पहचान

राजेश बताते हैं कि करीब सात साल पहले चरवा के काजू गांव में आयोजित दंगल में उन्होंने पहली बार कुश्ती लड़ी थी। इस मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए अभ्यास जारी रखा। उनका सपना था कि एक दिन दंगल में उनके नाम की गूंज हो। लगातार मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

चोटिल होने के बाद भी जीता फाइनल मुकाबला

26 सितंबर को पश्चिम शरीरा में आयोजित तीन दिवसीय दंगल में राजेश ने कई पहलवानों को शिकस्त दी। चोटिल होने के बावजूद उन्होंने फाइनल में जिला चैंपियन की कुश्ती लड़ी और जीत हासिल की। तीन साल पहले स्टेडियम में मैट पर आयोजित जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में भी वह विजेता रहे थे।
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मैट की सुविधा मिले तो निखरेगी प्रतिभा

राजेश युवाओं को नशे से दूर रहकर मेहनत और अनुशासन के साथ अभ्यास करने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि जिले के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। मिट्टी के अखाड़ों में मैट की व्यवस्था होने से पहलवान दोनों तरह की कुश्ती का अभ्यास कर सकेंगे और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
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