मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष के बाहर एक बीमार साधु घंटो तड़पता रहा। लेकिन किसी डॉक्टर अथवा कर्मचारी ने उसकी सुधि नहीं ली। दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया के हस्तक्षेप के बाद साधु को भर्ती कर इलाज शुरु किया गया।
जिला अस्पताल में अवकाश के दिन रामराज रहता है। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज मरे या जीए, किसी को फर्क नहीं पड़ता। रविवार की दोपहर भी ऐसा ही हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी में रहे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया लंच पर गए थे। इसी बीच कोई एक बीमार साधु को लेकर जिला अस्पताल आया और इमरजेंसी कक्ष के बाहर उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसकी कोई सुधि नहीं ली। इमरजेंसी के पोर्च के नीचे पड़ा साधु कराह रहा था। करीब दो घंटे बाद लोगों की वहां पर भीड़ जुटने लगी तो किसी ने डॉ. अरविंद कनौजिया को खबर दी। मौके पर पहुंचे चिकित्सक ने स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद साधु को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।