मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए आए लोग। संवाद
बदलते परिवेश, बढ़ते कामकाज के दबाव और अनियमित दिनचर्या के चलते नींद न आने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि छात्रों से लेकर नौकरीपेशा लोग बेचैनी, तनाव, भूख कम लगने और देर रात तक नींद नहीं आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. एके सिंह ने बताया कि रोजाना छह से आठ मरीज सिर्फ अनिद्रा या लगातार नींद कम होने की समस्या लेकर आ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या युवाओं की है।
उन्होंने बताया कि कॉलेज के छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा, ऑफिस वर्कर और अनियमित दिनचर्या वाले लोग इस समस्या के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। नींद पूरी नहीं होने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है। थकान, चिड़चिड़ापन, पेट संबंधी परेशानियां और भूख कम लगना आम लक्षण हैं। अधिक समय तक नींद नहीं आने पर मानसिक तनाव बढ़ने का खतरा भी रहता है।
रात में मोबाइल का उपयोग कम करें
लगातार मोबाइल व लैपटॉप का उपयोग, देर रात तक जागने की आदत, सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताना और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नींद पूरी नहीं होना सिर्फ एक सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग समय पर सोने-जागने की आदत डालें। रात में मोबाइल का उपयोग कम करें। तेज रोशनी से बचें तथा हल्का व्यायाम और ध्यान जैसी गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- नींद संबंधी समस्याओं में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज लोगों के बीच पहुंचकर जागरूक करने का काम करेंगा। समय रहते सावधानी न बरती गई तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। -डॉ. हरिओम सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज