क्षेत्र की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीबों के हक पर डाका डालने वालों की सरपरस्ती सिर चढ़ कर बोल रही है। अमर उजाला ने कोटे के खाद्यान्न में होने वाली वसूली को लेकर खबरें प्रकाशित की तो पूरा सिस्टम हिल गया। ऐसे में इस महीने वसूली के नए तरीके को ईजाद करने की कवायद शुरू कर दी गई है। वसूली करने वालों पर दबाव है कि कोटेदारों से वसूली में जरा सी भी लापरवाही की तो खैर नहीं होगी।
विकास खंड सिराथू और कड़ा की सार्वजनिक वितरण प्रणाली लूट तंत्र का शिकार हो गई है। शिकायत है कि जब से खाद्य सुरक्षा कानून लागू हुआ है। एक अधिकारी ने 70 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कोटेदाराें से कमीशन बांध अवैध धन उगाही के पुराने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि उच्च पद पर बैठे अधिकारी के इशारे पर स्थानीय स्तर पर वितरण प्रमाण-पत्र जारी किए जाने के दौरान टेंट ढीली कराई जाती है।
सूत्रों का कहना है कि अधिकारी के नाम पर वसूली करने वाले एक-एक दाने का हिसाब लगाकर कमीशन लेने के बाद ही प्रमाण-पत्र जारी करते हैं। चर्चा है कि इस तरह से होने वाली तकरीबन 20 लाख की वसूली का बंदर बांट किया जाता है। बताया जाता है कि 50 रुपये प्रति क्विंटल के दर से अधिकारी के पास पैसा जाता है। दस रुपये की दर से वसूली करने वाला अपने हिस्सा रखता है। शेष दस रुपये को स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को माहवारी के रूप में लिफाफा बनाकर भेज दिया जाता है। ताकि वे भी जुबान पर ताला लगाए रहें। लोगोें की निगाह इस बार होने वाले वसूली पर टिकी हुई है। पैसा पुराने तरीके से लिया जाता है या कोई नया तरीका अख्तियार किया जाता है।
स्थानीय स्तर पर सरकारी कोटेदारों से होने वाली अवैध धन उगाही का मामला सुलगने लगा है। चर्चा है कि विजलेंस टीम के कुछ सदस्यों ने गुपचुप तरीके से यहां का दौरा किया। टीम के सदस्य अहम जानकारी एकत्र करने के साथ खास स्थान को चिन्हित कर लौट गए हैं। ऐसे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि कहीं कोटेदारों से धन उगाही किए जाने का मामला उच्च स्तर पर तो नहीं पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि विजलेंस विभाग की एक टीम ने गत दिवस बेहद गोपनीय तरीके से क्षेत्र का दौरा किया है। टीम ने चुनिंदा जगह कीबाबत भी जानकारी हासिल की है। क्या टेपिंग की तैयारी का एक हिस्सा था टीम का दौरा। इस तरह ये सवाल हर किसी के जेहन में तेजी से कौंध रहे हैं। इस बाबत विजलेंस टीम के सदस्यों से जानने का प्रयास किया गया। पर, उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।