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घट गया केरोसिन का कोटा, होगी परेशानी

Sat, 15 Oct 2016 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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दोआबा के बाशिंदों को जल्द ही अंधेरे में रात गुजारनी होगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर तेजी से घटाया जा रहा केरोसिन का कोटा इस ओर साफ इशारा कर रहा है। सितंबर माह के अंत तक शासन ने 21 फीसदी की कटौती की है। इससे अब गांव के कार्डधारकों को दो की जगह महज एक लीटर तेल ही कोटे की दुकान से मिल सकेगा।
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दोआबा में बिजली आपूर्ति का बुरा हाल है। कस्बों की स्थिति तो कुछ ठीक है पर गांवों को कभी भी शाम छह बजे से बिजली नहीं मिलती। कहीं दस बजे से तो कहीं 12 बजे से बिजली का रोस्टर बना है। इस दौरान कुछ घरों में इनवर्टर, जनरेटर और सौर ऊर्जा है पर बिजली के अभाव में गरीबों को लालटेन और ढिबरी का ही सहारा रहता है। शासन द्वारा लगातार मिट्टी के तेल का कोटा घटाया जा रहा है। अगस्त के महीने तक जिले को 744 किलो लीटर मिट्टी का तेल मिलता था, लेकिन सितंबर के अंत में 21 फीसदी की कटौती करते हुए इसे 588 किलो लीटर यानि पांच लाख 88 हजार लीटर कर दिया गया। इस बार कोटेदारों को मिट्टी का तेल घटे हुए लक्ष्य के अनुरूप दिया जाएगा।

विभागीय जिम्मेदारों की माने तो मिट्टी के तेल का कोटा घटने के बाद अब कार्डधारकों को दो की जगह लगभग एक लीटर तेल ही दिया जाएगा। सूत्रों की माने तो शासन द्वारा अप्रैल के अंत तक मिट्टी के तेल को खुले बाजार में उतारते हुए पूरी तरह से कोटे का आवंटन खत्म कर दिया जाएगा। ऐसा हुआ तो दोआबा के गरीबों को अब न केवल अंधेरे में रात गुजारनी होगी बल्कि भोजन पानी भी करना मुश्किल होगा। उधर तेल का कोटा कम होता देख कोटेदारों का भी हाल बेहाल है। तेल को लेकर अभी तक कार्डधारकों से वितरण के दौरान बहस होती थी। लक्ष्य घटने बाद वह स्थिति को कैसे संभालेंगे।
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केंद्र सरकार द्वारा मिट्टी के तेल का कोटा जनपद में 21 फीसदी घटाया गया है। अन्य जनपदों में यह स्थिति 50 फीसदी तक पहुंच गई है। भारत सरकार की मंशा पर जाएं तो अप्रैल माह में केरोसिन को खुले बाजार में उतार दिया जाएगा। लोगों को सब्सिडी कैसे दी जाएगी इस बावत कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं मिल सकी है।
आनंद कुमार सिंह, डीएसओ कौशाम्बी

कोटेदार खोलेंगे मोर्चा
कोटेदार संघ के अध्यक्ष लाखन सिंह राजपासी का कहना है कि केंद्र की सरकार ने लोगों को छला है। आम आदमी की जरूरत केरोसिन से पूरा होती है लेकिन इसमें भारी कटौती से लोगों को दिक्कत होगा। भारत सरकार की इस मामले में रणनीति साफ नहीं है। इसका कोटेदार विरोध करेंगे। पुराने आवंटन के हिसाब से यदि मिट्टी का तेल न दिया गया तो आंदोलन होगा। जल्द ही बैठक कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
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