माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि पर कौशाम्बी पुलिस भी मेहरबान रही है। राजूपाल हत्याकांड के गवाह ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला करने के बाद फरार शूटर अब्दुल कवि की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने न तो प्रयास किया और न ही उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित कराया। हैरानी की बात तो यह है कि गवाह को पुलिस ने अपनी तरफ से कोई सुरक्षा भी नहीं दी।
25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में राजू पाल की हत्या की जांच कर रही सीबीआई ने सरायअकिल के भखंदा गांव निवासी अब्दुल कवि का नाम प्रकाश में लाया। अब्दुल कवि को माफिया अतीक का शूटर बताया गया। 14 फरवरी को सीबीआई ने भगोड़ा घोषित किए जा चुके कवि के घर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। इसके बाद 24 फरवरी को राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल व उनके दो सरकारी गनर की हत्या कर दी जाती है। इसके बाद हरकत में आई सीबीआई व एसटीएफ सहित पुलिस को माफिया के शूटर अब्दुल कवि की याद आई।
उमेश पाल की हत्या के बाद चेती पुलिस
पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने तीन मार्च को उसके घर पर बुलडोजर चलवा दिया। अब सवाल ये है कि कौशाम्बी पुलिस शूटर अब्दुल कवि पर इतने दिनों तक मेहरबान क्यों रही? दरअसल सरायअकिल कोतवाली के चकपिन्हा गांव निवासी ओम प्रकाश पाल भी उमेश पाल की तरह हत्याकांड के गवाह हैं। शूटर अब्दुल कवि ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर एक अक्तूबर 2020 को ओमप्रकाश को राजूपाल हत्याकांड में गवाही नहीं देने की धमकी दी थी।
ओम प्रकाश ने अब्दुल कवि की बात मानने से इनकार किया तो उसने उन पर तमंचे से फायर किया। किसी तरह ओम प्रकाश ने मौके से भाग कर अपनी जान बचाई। इस मामले में ओमप्रकाश की तहरीर पर सरायअकिल कोतवाली में अपराध संख्या 453 वर्ष 2020 में जानलेवा हमला, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा पंजीकृत किया गया। इसके बाद भी पुलिस ने अब्दुल कवि को गिरफ्तार करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इतना ही नहीं, उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम तक घोषित नहीं कराया। चर्चित राजूपाल हत्याकांड के गवाह ओमप्रकाश की सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया।
घोषित किया गया 50 हजार का इनाम
अब उमेश पाल हत्याकांड के बाद शूटर अब्दुल कवि को लेकर पुलिस संजीदा हुई है। आईजी चंद्र प्रकाश ने अब्दुल कवि पर शनिवार को ही 50 हजार का इनाम घोषित किया है। इस बाबत इंस्पेक्टर सरायअकिल विनीत सिंह का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। अब्दुल कवि के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जानकारी है। कवि व उसके साथियों को चिह्नित करने का प्रयास किया जा रहा है। रहा सवाल, ओमप्रकाश की सुरक्षा का तो इस बाबत वह कुछ नहीं बता सकते। इसकी जानकारी अभिसूचना विभाग के लोग ही बेहतर दे सकते हैं।
सुरक्षा तो दूर, मुकदमे की कॉपी तक नहीं दे रही थी पुलिस
सरायअकिल के चकपिन्हा गांव निवासी ओमप्रकाश किसानी के अलावा प्रयागराज में डेयरी का कारोबार करते हैं। ओम प्रकाश का कहना है वह राजूपाल के साथ रहते थे। उनकी मौत के बाद अब उनकी पत्नी चायल विधायक पूजा पाल के साथ रहते हैं। सितंबर 2020 में जब उनके साथ घटना हुई तो तत्कालीन थानाध्यक्ष विक्रम सिंह थे। तहरीर देने के बाद काफी दिनों तक मुकदमा ही नहीं लिखा गया। इसके बाद जानकारी हुई कि मुकदमा दर्ज हो गया है। पुलिस ने मुकदमे की कॉपी तक नहीं दी। सुरक्षा की व्यवस्था तो दूर की बात रही। ओम प्रकाश का कहना है उनकी भी सीबीआई कोर्ट में गवाही होना है।