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हृदय रोग से पीड़ित मासूम को इलाज की दरकार

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मंझनपुर। हृदय रोग से पीड़ित मोहम्मदपुर गांव की एक मासूम बच्ची चार साल से जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष कर रही है। नन्हीं सी इस जान के दिल में जन्म से ही छेद है। पीजीआई में इसका ऑपरेशन होना है। आर्थिक तंगी के कारण लाचार परिजन मामूली दवाएं तक नहीं खरीद पा रहे हैं। बेटी की जिंदगी बचाने के लिए लाचार पिता ने सांसद से लेकर अफसरों और समाजसेवियों तक से मदद की गुहार लगाई है। अफसोस कि अभी तक किसी ने सहायता के लिए एक भी कदम आगे नहीं बढ़ाया है।
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चायल तहसील क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव निवासी संदीप सिंह ने बताया कि 19 अक्तूबर 2011 को उसकी बेटी दीपांजली का जन्म हुआ। जन्म के ठीक दो महीने बाद दीपांजली बीमार हो गई। परिवार वालों ने स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराया पर कोई आराम नहीं मिला। जांच में पता चला कि उसके दिल में छेद हैं। इसके बाद इलाहाबाद शहर के तमाम चिकित्सालयों में उपचार चला। हालांकि इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। बेटी के इलाज को परेशान पिता 25 मार्च 2015 को अपनी बीमार बेटी को लेकर एसआरएन गया। वहां डॉक्टरों ने मासूम की हालत देखने के बाद उसे एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया। 

चिकित्सकों का कहना है कि ऑपरेशन के अलावा बच्ची को बचाने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है। इधर, परिवार वालों के पास अब स्थानीय स्तर पर इलाज कराने की भी हैसियत नहीं बची है। पिता संदीप कुमार ने बताया कि थोड़े बहुत जो रुपये थे वो अब तक के इलाज में खर्च हो चुके हैं। रिश्तेदारों और करीबियों से भी इतना कर्ज ले लिया गया है कि अब किसी से मांगने की हिम्मत नहीं पड़ती। ऐसे में मासूम बच्ची की जिंदगी मझधार में फंस गई है। जल्द से जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ तो न जाने क्या होगा। इसे लेकर परिजनों के आंसू नहीं थम रहे हैं। पिता ने आर्थिक मदद के लिए सांसद विनोद सोनकर, जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंह समेत अन्य कई समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को अर्जी दी है। अभी तक किसी ने भी इस लाचार पिता की फरियाद नहीं सुनी है।
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