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कौशाम्बी में मां, बच्चों का इलाज भगवान भरोसे

Fri, 12 Feb 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
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यमुना तराई में बसे 50 से अधिक गांव के लोगों को सस्ता एवं सुलभ इलाज के लिए बारा बाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है। पर, यह अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मनमानी का शिकार होकर रह गया है। अस्पताल में दवा ही नहीं डाक्टरों का भी टोटा है। बालरोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, रेडियोलाजिस्ट और सर्जन की तैनाती ही नहीं है। इसके अलावा लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ता है।


कौशाम्बी के बारा बाजारा में 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। यहां अभिलेखों में अधीक्षक समेत 8 चिकित्सकों के पद हैं। पर, मौजूदा समय में सर्जन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और रेडियोलाजिस्ट पद पर किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। वार्ड ब्वाय, नर्सों की भी कमी है। सर्जन, बाल रोग और महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण लोगों को इलाज के लिए 50 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल अथवा इलाहाबाद जाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। डाक्टरों के साथ ही अस्पताल में दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। देखें तो इस समय मौसमी बीमारियों से पीड़ितों की भीड़ रोजाना अस्पताल में लगती है। पर, सभी मरीजों को वहीं लाल, पीली, नीली टैबलेट्स थमाकर इलाज की खानापूर्ति कर दी जाती है। बृहस्पतिवार को सीएचसी बारा में दवा के लिए आई बेरूआ गांव की अन्नू, गौरेए गांव की रेखा देवी, बेहन का पुरा गांव की जाननिसार, खुंदमीरपुर गांव के धर्मपाल, गुरौली गांव के बबलू, बरई बंधवा गांव के रामकुमार आदि ने बताया कि उन्हें ज्यादातर दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं।  
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3 साल से बंद पड़ी है अल्ट्रासाउंड मशीन
बारा (ब्यूरो)। सीएचसी बारा में उपचार, प्रसव के अलावा अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे आदि की भी सुविधा मुहैया कराई गई है। पर, यह सुविधाएं भी अफसरों की अनदेखी के कारण मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। देखें तो सीएचसी में 3 साल से अल्ट्रासाउंड मशीन बंद पड़ी है। इसकी वजह अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होना है। इसके कारण सबसे ज्यादा दिक्कत गर्भवती महिलाओं और पेट की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को झेलनी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लोगों को मंझनपुर, इलाहाबाद जाना पड़ता है।
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नर्सों और दाईयों के भरोसे है प्रसव
बारा (ब्यूरो)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बारा में 24 घंटे प्रसव की सुविधा है, लेकिन अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। अस्पताल में डॉ ज्योति मिश्रा की तैनाती है, लेकिन वह सिर्फ दिन में ओपीडी ही करती है। ऐसे में रात में प्रसव के लिए युवतियों के आने पर एएनएम, स्टाफ नर्स और दाईयों के भरोसे ही प्रसव कराया जाता है। कई बार इससे दिक्कतें भी पैदा हुई हैं, फिर भी अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की जा सकी है।
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क्या कहते हैं मुख्य चिकित्साधिकारी
जनपद में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पोस्ट भरें जाएं। इसके लिए कई बार शासनस्तर तक लिखापढ़ी की गई है। उच्चाधिकारियों को भी समस्याओं से लगातार अवगत कराया जाता रहा है। प्रयास हो रहा है कि अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरे जा सकें।
डॉ यूबी सिंह, सीएमओ कौशाम्बी
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