बेमौसम बारिश में बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे में खेल हो रहा है। लेखपाल ने दो-दो साल पहले मर चुके किसानों के नाम चेक बना दिया है। यही नहीं मुर्दों के हस्ताक्षर भी प्रमाणित कर दिए गए हैं। परिवार के लोग मुर्दों के नाम पर बने आपदा राहत राशि के चेक के भुगतान में फर्जीवाड़ा करने को मजबूर हैं। लेखपालों के इस खेल का भंडाफोड़ बुधवार को एसबीआई की चायल शाखा में हुआ। जहां मुर्दों के नाम बने चेक का फर्जी आईडी लेकर भुगतान के लिए जलालपुर शाना गांव के लोग आए थे। शाखा प्रबंधक ने मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है। बैंक प्रबंधक ने बताया कि दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा जाएगा।
बीते वर्ष फरवरी, मार्च में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कौशाम्बी के लाखों किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहतराशि का चेक दिया जा रहा है। पर, इसमें लेखपाल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसी ही मनमानी चायल ब्लॉक के जलालपुर शाना गांव में की गई है। जहां लेखपाल ने तीन मृतकों के नाम राहतराशि चेक बनाते हुए उनके हस्ताक्षर प्रमाणित कर दिया। एसबीआई चायल के शाखा प्रबंधक रामबाबू ने बताया कि जलालपुर साना गांव के समोदी पुत्र परऊ, रामदास पुत्र प्यारेलाल और कुन्दन पुत्र रामसरन के नाम की चेक और फर्जी आईडी लेकर बुधवार को लोग भुगतान के लिए बैंक आए थे।
चेक लेकर बैंक आए गांव के राम सजीवन पर बैंककर्मी को शक हुआ। पूछताछ करने पर वह घबरा गया और बता दिया कि यह चेक जिस व्यक्ति का है। उसकी दो साल पहले मौत हो चुकी है। कैशियर ने राम सजीवन को भुगतान नहीं किया। उसे डांटकर भगा दिया। जबकि अन्य जो लोग मृतक का चेक लेकर भुगतान को आए थे, भाग निकले। शाखा प्रबंधक की मानें तो लेखपाल ने मनमानी करते हुए मृतकों के नाम चेक जारी कर दिया है। बताया कि दोषी कर्मी के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा जाएगा। मामले में एसडीएम अश्विनी कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि राहतराशि चेक वितरण की जिम्मेदारी तहसीलदार को दी गई है। उनसे रिपोर्ट ली जाएगी। वहीं तहसीलदार बीडी गुप्ता का कहना है कि ऐसी मनमानी की गई है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।