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ठंड का कहर जारी, वृद्ध की थमी सांसें

Sat, 23 Jan 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूराे काैश्ााम्बी
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बूंदाबांदी के बाद चल रही तेज पछुआ हवा से कौशाम्बी में भीषण ठंड का कहर जारी है। गलनभरी ठंड की चपेट में आने से मौतों का सिलसिला जारी है। शुक्रवार की रात ठंड की जद में आने से सिराथू तहसील के ठिकवापर कादीपुर गांव में एक वृद्ध की मौत हो गई। रात में अचानक उसके सीने और पेट में तेज दर्द उठा। जब तक परिजन दवा के लिए उसे लेकर कहीं जाते, सांस थम चुकी थी। वृद्ध की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा है।
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सिराथू तहसील क्षेत्र के ठिकवापर कादीपुर गांव निवासी मोतीलाल (65) शुक्रवार की शाम खेत की ओर गया था। देर शाम लौटने के बाद उसने खाना खाया और बरामदे में बने कमरे सो गया। आधी रात अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। तेज कंपकंपी के साथ पेट और सीने में असहनीय दर्द होने लगा। उसकी कराह सुनकर घरवाले घबरा गए। परिवार के लोग जब तक उसे इलाज के लिए कहीं लेकर जाते, वृद्ध की सांसें थम चुकी थी। परिजनों का मानना है कि वृद्ध को ठंड लग गई थी। इसी से मौत भी हुई है। शनिवार का परिजनाें ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वृद्ध की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बता दें कि मंगलवार को दिनभर हुई बारिश के बाद से कौशाम्बी में भीषण ठंड का कहर है। पश्चिम से आ रही तेज बर्फीली हवाओं से ऐसी तीखी गलन है। जिससे घर-बाहर हाथ-पैर सुन्न बने रहते हैं। सुबह शाम घने कोहरे के साथ हांड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है।


 जाड़े के इस कहर से रोजाना मौतें भी हो रही हैं। मंगलवार से लेकर शुक्रवार के बीच ठंड की चपेट में आने से 6 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच शनिवार की दोपहर धूप चटकी थी, लेकिन जैसी ही सूरज ढला। फिर से कड़ाके की ठंड शुरू हो गई। वहीं सुबह तो ऐसा घना कोहरा था, जिससे 5 मीटर दूर भी दिखाई देना मुश्किल रहा। इस कोहरे के कारण सुबह 9 बजे तक सड़कों पर वाहन भी रेंगते नजर आए।
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इनसेट
जानलेवा जाड़ा के बाद भी अलाव नहीं
मंझनपुर (ब्यूरो)। कौशाम्बी में बर्फीली हवाओं के साथ घने कोहरे की चादर तनने से भीषण ठंड पड़ रही है। सुबह-शाम तीखी गलन है। जिसके कारण लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल है। ठंडी हवा के झोंके जान लेने पर उतारू हैं। जानलेवा जाड़े के बाद भी मंझनपुर समेत ज्यादातर कस्बों में अलाव की व्यवस्था नदारद है। कुछ कस्बों में खानापूर्ति के लिए अलाव के नाम पर दो-चार लकड़ियां राजस्वकर्मियों ने रखकर सुलगा दी है। अलाव के नाम पर कर्मचारियों की यह मनमानी किसी भी अधिकारी को नहीं दिख रही है। जबकि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं होने से गरीब और राहगीर कंपाने को मजबूर हैं। दूसरी तरफ अफसर जहां सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था का जायजा लेने और लापरवाही पर आंखें मूदें हैं, वहीं उनके दफ्तर में दिन में भी हीटर, ब्लोअर की व्यवस्था है।
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