देश की सेहत कौशांबी का केला सुधार रहा है। नवरात्र पर्व शुरू होते ही कौशांबी के केले की मांग गुजरात और दिल्ली में बढ़ गई है। एक कंपनी ने ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी संभालते हुए कौशाम्बी से केले की सप्लाई भी शुरू कर दी है। नवरात्र में व्रत रहने वाले फलों का सेवन करते हैं। इसको देखते हुए यह कारोबार एकदम से अपने रंग में आ गया है।
दोआबा इन दिनों केला उत्पादन का हब बन चुका है। मौसम अनुकूल होने की वजह से इस साल केले की अच्छी फसल तैयार हुई है। लंबे फल होने की वजह से इसकी मांग देश के कोने-कोने से होने लगी है। नवरात्र के मौके पर तो व्यापारी किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं। फलों को देखकर वह किसानों को मुंह मांगा रुपया देकर फलों की खरीद कर रहे हैं। अच्छे किस्म के फसलों से लोगों की सेहत तो सुधर ही रही है किसानों को अच्छा मुनाफा भी हो रहा है।
कौशांबी के केले को एक कंपनी ने निर्यात करना शुरू कर दिया है। वह सीधे किसानों से खरीदकर एमपी, आगरा, दिल्ली, बनारस के अलावा गुजरात भेज रही है। कंपनी सबसे ज्यादा केले की सप्लाई गुजरात में कर रही है। धागे केले की कटिंग कराकर बाकायदा की उसकी पैकिंग कराई जाती है, इसके बाद केले की खेप गुजरात भेजी जाती है। नवरात्र से पहले यह कारोबार चमक गया था। आय में इजाफा होते ही किसानों के चेहरे खिल गए हैं।
2100 हेक्टेयर में हो रही है खेती
मंझनपुर (ब्यूरो)। दोआबा में इस साल किसानों ने 21 सौ हेक्टेयर में केले की खेती कर रखी है। इनमें सबसे अधिक किसान फरीदपुर समरो, मोअज्जमपुर, बरेठी और नगरेहा के शामिल हैं। इन क्षेत्रों में केले की खेती 60 फीसदी भूमि पर की जा रही है। अन्य फसलों की तुलना में चार गुुना नगदी रकम की कमाई होने से किसान केले की खेती में अधिक रुचि ले रहे हैं। उनका मानना है कि साल भर की खेती में एक हेक्टेयर में उन्हें छह से आठ लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है।
तीन हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती कर रखी है। प्रति हेक्टेयर छह से आठ लाख का शुद्ध लाभ केले की फसल से हो रहा है।
मिथिलेश मौर्य, किसान फरीदपुर संवरो
मौसम अनुकूल होने की वजह से केले की अच्छी पैदावार हुई है। अच्छा फायदा मिलने से पिछले साल सूखे में हुआ घाटा भी पूरा हो गया है।
अंगद मौर्य, किसान मोअज्जमपुर करारी
मैने इस साल पांच हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती कर रखी है। अब तक डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति बीघा मुनाफे का औसत आ रहा है।
मो. हासिम, किसान बरेठी
नवरात्र पर्व के पहले से केले की मांग बढ़ गई थी। एक कंपनी के ट्रांसपोर्ट करने से जिले के किसानों का इसका बहुत फायदा मिल रहा है। अच्छी कमाई ने किसानों का रुझान केले की खेती की ओर और बढ़ा है।
पंकज शुक्ल, डीएचओ कौशाम्बी