विश्व रक्तदान दिवस पर शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर संयुक्त जिला चिकित्सालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में रक्तदान करने के लिए अफसर, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवियों युवाओं में जबर्दस्त उत्साह दिखा। इस दौरान करीब 18 लोगों ने आकर रक्तदान किया।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में शुक्रवार को रक्तदानियों के उत्साह से माहौल उत्सव सरीखा रहा। चायल विधायक संजय कुमार गुप्ता, डीएम मनीष कुमार वर्मा, एसपी प्रदीप कुमार गुप्ता ने संयुक्त रूप से अमर उजाला के रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। विधायक और डीएम ने खुद रक्तदान कर लोगों को इसके लिए प्रेरित किया।
विधायक ने कहा कि खून की कमी से लोगों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान से बड़ा कोई दूसरा पुण्य कार्य नहीं है। कहा कि जागरूक होकर भ्रांतियों को दरकिनार करते हुए लोगों को खुद ही रक्तदान की पहल करनी चाहिए। डीएम ने कहा कि रक्तदान महादान है। इस पुण्य कार्य में हर किसी को सहभागिता करनी चाहिए। इससे खून की कमी के कारण होने वाली मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
एसपी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि सड़क हादसे में घायलों को तुरंत खून की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में उस वक्त घायलों के परिजन नहीं होते है। ऐसे में लोगों द्वारा किया गया रक्तदान किसी की जिंदगी बचाने में काम आता है।
शिविर में सीएमओ डॉ पीएन चतुर्वेदी, सीएमएस दीपक सेठ, चिकित्साधिकारी डॉ राममनोहर कनौजिया, मोती लाल सिंह, पीयूष शुक्ला, शिवप्रताप सिंह, राम मिलन शुक्ला, प्रवीण कुमार चंदेल, अनिल कुमार, अभिषेक सिंह स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष श्यामसुंदर केसरवानी, विधायक के मीडिया प्रभारी सूरज यादव आदि ने सहभागिता निभाई।
महज 12 घंटे में हो जाती है रक्तदान की भरपाई
मंझनपुर। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ दीपक सेठ ने बताया कि 18 से 60 साल के भीतर का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। प्रत्येक तीन माह में एक बार रक्तदान करने से स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है। बताया कि रक्तदान करने के महज 12 घंटे में ही खून की भरपाई हो जाती है।
अमर उजाला की पहल ने लालचंद्र को दी नई जिंदगी
मंझनपुर। जिला अस्पताल में तीन दिन से जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे लालचंद्र के लिए अमर उजाला की पहल ने नया जीवन देने का काम किया। दरअसल लालचंद्र को खून की सख्त जरूरत थी। उसके परिजनों में कोई इस हालत में नहीं था कि उसका ब्लड लिया जा सके। ब्लड बैंक में भी उसके ग्रुप ए पॉजिटिव का रक्त नहीं था। ऐसे में अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर शिविर में ब्लड बैंक के कर्मचारी मनोज यादव ने रक्तदान कर लालचंद्र को नई जिंदगी देने का काम किया।