पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए बुधवार को सुहागिनों ने करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा। सोलह श्रृंगार करके महिलाओं ने इस दौरान सामूहिक रूप से शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा की। वहीं रात में चांद देखकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण किया।
धर्मशास्त्रों के मुताबिक शिव को पति के रूप में हासिल करने के लिए पार्वती जी ने निर्जला व्रत रखा था। तभी से युवतियां सदा सुहागन रहने के लिए इस व्रत को रखती हैं। इस व्रत को लेकर तमाम अन्य कथाएं भी हैं। द्वापर में अर्जुन के लिए द्रोपदी ने भी भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर करवा चौथ का व्रत किया था। करवा चौथ का दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली युवतियां दिन में सोलह श्रृंगार करके शिव-पार्वती की सामूहिक रूप से बैठकर पूजा करती है। करवा चौथ की कथा सुनती और सुनाती है।
रात में चांद निकलने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर होने वाला सुहागिनों का यह व्रत इस साल बुधवार को था। जिलेभर की औरतों ने पतियों की लंबी उमर और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को रखा। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महराज ने बताया कि सुहागिनों के लिए यह व्रत सुखदायी एवं फलदायी होता है। सुहागिने पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। वहीं युवतियां भी इस व्रत को रख कर भगवान शिव-पार्वती की पूजन अर्चन करती हैं।