कामधेनु योजना ने जिले में दुग्ध क्रांति लाने के साथ ही बेरोजगारों को रोजगार भी दिया है। अभी 11 और डेयरी खुलना है, इसके लिए लोगों ने आवेदन कर दिया है। जिले में प्रतिदिन लगभग सवा लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें कामधेनु की 19 डेयरियों से प्रतिदिन लगभग 35 सौ लीटर दूध का उत्पादन होता है। कामधेनु डेयरी के माध्यम से करीब 150 लोगों को रोजगार भी मिला है, जो दूध निकालने, बेचने के अलावा गोबर खाद की बिक्री भी करते हैं। जिले की एक डेयरी मध्यप्रदेश के रीवां भी प्रतिदिन दूध भेजती है। इस योजना से जिले की सेहत में काफी सुधार आया है।
जिले में दुग्ध क्रांति लाने के लिए कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रति यूनिट सौ से 20 दुधारु पशुओं की यूनिट स्थापित कराई जा रही है। कौशाम्बी के पशुपालन विभाग को अब तक 19 इकाइयों को क्रियाशील करने में सफलता मिली है। इनमें कामधेनु की तीन, मिनी कामधेनु की छह और माइक्रो कामधेनु की 10 इकाइयां शामिल हैं। तीनों प्रकार की 19 इकाइयों से प्रतिदिन लगभग 35 सौ लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है।
कामधेनु योजना के तहत लगभग 150 लोगों को रोजगार भी मिला है। यहां काम करने वाले महीने में पगार लेकर गाय व भैंस की देखभाल करते हैं। इन डेयरियों के दूध से जिले की जरूरत तो पूरी ही की जा रही है बड़े डेयरी संचालकों के माध्यम से मध्यप्रदेश के रीवां भी दूध भेजा जा रहा है। इससे जिले में उत्पादित हो रहे दूध से न केवल कौशाम्बी बल्कि गैर जनपदों और प्रांतों के बच्चों, बूढ़ों और जवानों की सेहत सुधर रही है। दूसरी ओर डेयरी संचालक और उसमें काम करने वाले मजदूरों की माली हालत भी सुधर रही है।