विद्यालय की इमारत कितनी भी अच्छी हो, यह मायने नहीं रखता है। शिक्षा की गुणवत्ता क्या है और कैसी शिक्षा दी जा रही है। किसी भी विद्यालय के लिए यह विशेष महत्व रखता है। यह कहना है सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का।
उन्होंने आलमचंद्र स्थित महेश्वरी इंटर कॉलेज की सराहना की। कहा कि विद्यालय में गुणवत्ता युक्त शिक्षा दी गई है। 1966 में प्राइमरी विद्यालय के रूप में एक बीज रोपा गया था। आज यह बड़ा पेड़ बन चुका है। यहां 27 सौ बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। यह गौरव की बात है। एक प्रस्तुति पर कहा कि धरती माता के बारे ने लघु नाटिका के माध्यम से पर्यावरण का जो संदेश बच्चों ने दिया है, उससे हम सबको सीख लेनी चाहिए।
जस्टिस गवई ने बताया कि वह 22 दिन में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। रिटायरमेंट के पहले यहां पहुंचकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस विक्रम नाथ, इलाहाबाद विवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव समेत अन्य लोगों के प्रति आभार जताया।
इस मौके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह, जिला जज जेपी यादव, कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय संगीता श्रीवास्तव, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अजय कुमार मिश्रा, डीएम डॉ. अमित पाल, एसपी राजेश कुमार, सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी, बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, सौमित्रा दयाल सिंह, प्रबंधक वत्सल नाथ, प्रधानाचार्य जितेंद्र नाथ श्रीवास्तव मौजूद रहे।
15 माह सात दिन बाद जस्टिस विक्रम नाथ बनेंगे सीजेआई
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने मंच से बताया कि विद्यालय परिवार से जुड़े व उन्हें भाई की तरह मानने वाले जस्टिस विक्रम नाथ 15 माह सात दिन बाद सीजेआई बन जाएंगे। इनके साथ ही कौशाम्बी का नाम पूरे देश में प्रसिद्ध हो जाएगा।
चप्पे- चप्पे पर रही पुलिस
आलमचंद्र में कार्यक्रम के पहले ही सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान पहुंच गए थे। सीजेआई के आने के बाद से पुलिस पूरी तरह से सतर्क रहीं। करीब डेढ़ घंटे के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के पूरे इंतजाम रहे। स्कूल की छत व आसपास के परिसर के साथ ही पूरे गांव में पुलिस के जवान फैले रहे। हर रास्ते पर पुलिस की निगाह रही।
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