बिना पूंजी और जमीन के बन गए निवेशक
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से एमओयू साइन करने वालों को उम्मीद बैंकों के नियमों पर खरा उतर कर ऋण पाने की भी होगी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। सरकार से मिल रही रियायतों और प्रशासन से मदद के भरोसे पर यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सहमति पत्र तो निवेश के लक्ष्य से तकरीबन चार गुना आ गए, लेकिन इनमें से कितने उद्योग लगते हैं, यह तो वक्त ही बताएगा। इसकी वजह एमओयू साइन करने वालों में अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिनके पास न तो भूमि है और न ही आर्थिक मजबूती। सरकारी छूट के साथ इन्हें जमीन और बैंक से ऋण भी चाहिए, जो हासिल करना हर किसी के लिए आसान नहीं है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत उद्योग लगाने के लिए 92 लोगों ने तकरीबन 1169.66 करोड़ के निवेश का एमओयू साइन किया है। इनमें अनुमानित 10 से 15 लोग ही ऐसे निकल कर आएंगे जिनके पास अपने प्लान की खातिर भूमि होगी। अन्य लोगों ने इस उम्मीद के साथ एमओयू साइन किया है कि मंझनपुर के भेलखा या कड़ा में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में उन्हें जमीन दी जाएगी। किन्हीं कारणों से भूमि न मिली तो फिर उद्यमी बनने के इनके सपने पर पानी फिरना तय है। कुछ ऐसा ही हाल आर्थिक मजबूती का भी है।
वैसे तो एमओयू साइन करने वाले तकरीबन सभी निवेशक बैंकों से ऋण लेंगे। इसमें बैंकों के मानकों पर उन्हें खरा उतरना पड़ेगा। कहीं कोई पेच फंसा और ऋण की फाइल अटकी तो करीब 10 निवेशक ही ऐसे हैं, जो बिना बैंकों की मदद के अपनी उद्योग को धरातल पर उतार सकते हैं। उद्यमी बनने या अपने कारोबार को बढ़ाने के अन्य निवेशकों का सपना टूट सकता है।
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दूध का कारोबार है। दूध के उत्पाद बनाने का प्लांट लगाना चाहता हूं। इसी के लिए 50 करोड़ का ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू साइन किया गया है। बैंक से ऋण लेना है, लेकिन अभी आवेदन नहीं किया है। औद्योगिक क्षेत्र में जमीन मिल जाएगी तो ठीक। अन्यथा चित्रकूट या अन्य किसी जिले में प्रयास करुंगा।
- रामकृष्ण केसरवानी, घासीपुर
15 करोड़ से फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की इच्छा है। आटा, मैदा आदि बनाने का काम यहां पर होगा। सुविधाओं के लिहाज से कड़ा के औद्योगिक क्षेत्र में भूमि मिलेगी तो ही काम बनेगा। बैंक से लोन कराने की भी जरूरत है, हालांकि अभी आवेदन नहीं किया है। बैंक से ऋण लिए बिना तो प्लांट लगाना संभव ही नहीं होगा।-
वेद प्रकाश, मंझनपुर
इंसेट भूमि संकट आएगा आड़े
मंझनपुर। प्रशासन की ओर से मंझनपुर के भेलखा में करीब 150 हेक्टेयर का औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। जमीन चिह्नित हो गई है। मंजूरी के लिए इसका प्रस्ताव शासन में लंबित है। मिनी औद्योगिक क्षेत्र कड़ा के लिए अभी भूमि चिह्नित नहीं हुई है। अगर, औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो भी जाए तो हर निवेशक की भूमि की मांग पूरी करना संभव नहीं होगा। कारण, भूमि पर्याप्त है ही नहीं। इंसेट बैंकों के इन नियमों का करना होगा सामना
उद्योग लगाने के लिए भूमि होनी चाहिए
उद्योग चलाने और उत्पाद की बिक्री का अनुभव होना चाहिए
निवेशक का बैंक में सिविल खराब नहीं होना चाहिए
पुराने ऋण में किसी कोर्ट से सेटेलमेंट नहीं होना चाहिए
बाजार और समाज में प्रतिष्ठा होनी चाहिए
उद्योग लगाने के लिए ऋण तभी मिलता है जब आवेदक के पास भूमि हो। इसके अलावा भी बैंक के कई मानक होते हैं, जिन पर खरा उतरना जरूरी है। मानकों को पूरा करने पर ऋण अवश्य मिलेगा। ऐसे उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- जितेंद्र कुमार चौधरी, एलडीएम
साइन किए गए एमओयू में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में भूमि देने का कहीं जिक्र नहीं है। निवेशकों के पास अपनी भूमि होनी चाहिए। सरकार की ओर से जितनी भी सुविधाएं दी जा रहीं हैं, वह उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने पर वहां भूमि का आवंटन भी नियमों के अनुरूप होगा।
- एस. सिद्दीकी, उपायुक्त उद्योग