सैनी के जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में तैयार हो रहे जैविक कीटनाशक की बढ़ी मांग
प्रयागराज मंडल के साथ ही कानपुर नगर और रायबरेली को भी दी जा रही आपूर्ति
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सैनी। आईपीएम (जैव नियंत्रण) प्रयोगशाला सैनी में बनने वाले जैविक कीटनाशक की मांग बढ़ रही है। इसकी मांग प्रयागराज मंडल के साथ ही कानपुर और रायबरेली जनपद के भी किसान कर रहे हैं। मांग को देखते हुए कृषि विभाग ने उत्पादन का लक्ष्य भी बढ़ा दिया है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि कानपुर से संबद्घ सैनी में आईपीएम की प्रयोगशाला तकरीबन दो दशक पहले स्थापित की गई थी। इस प्रयोगशाला में कृषि मित्र के रूप में जैविक कीटनाशक (बेवेरिया बैसियाना) कृषि वैज्ञानिकों की टीम द्वारा तैयार की जाती है। केंद्र प्रभारी अजीत सिंह यादव ने बताया कि यहां तैयार होने वाला जैविक कीटनाशक मनुष्यों एवं मिश्र कीटों के लिए हानिकारक नहीं है। इसे प्रति हेक्टेयर 3 से 6 किग्रा 30 किग्रा कंपोष्ट में मिलाकर फसल में छिड़काव किया जाता है। पहले इसकी सप्लाई प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ जिलों में होती थी। इन जनपदों के केंद्रीय बफर गोदाम के जरिए किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन अब इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग कानपुर नगर के साथ रायबरेली को भी आपूर्ति कर रहा है। यह जैविक कीटनाशक दलहन एवं तिलहन की सभी फसलों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इस वर्ष विभाग ने उत्पादन का लक्ष्य 31 टन रखा है। जबकि इससे पहले तक 28 टन ही उत्पादन होता था। सरकार किसानों को अपने बफर गोदाम से सौ रुपये प्रति किग्रा की दर से उपलब्ध कराती है। इसमें से 70 रुपये बतौर सब्सिडी किसान के खाते में वापस भेज दी जाती है। इस प्रकार यह किसानों को मात्र 30 रुपये प्रति किग्रा ही पड़ती है।