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दो साल से मजदूरी के लिए भटक रहे 17 गांवों के मजदूर

Wed, 10 Aug 2016 12:31 AM IST
कौशाम्बी ब्यूरो
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विकास खंड कौशाम्बी के 17 गांवों के मनरेगा मजदूर करीब दो साल से मजदूरी के लिए भटकर रहे हैं। मजदूरी के लिए जॉब कार्डधारक सम्बंधित पंचायतमित्र, ग्राम प्रधान और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। इस वजह से तकरीबन 123 मनरेगा मजदूरों में आक्रोश है।
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विकास खंड कौशाम्बी के अतरसुइया, बारा, भटवरिया, जुगराजपुर, महंगूपुर समेत 17 गांवों के तकरीबन 123 जॉबकार्ड धारक मजदूरों ने सम्बंधित ग्राम सभाओं में मजदूरी की थी। वर्ष 14-15 में संबंधित गांवों के प्रधानों ने मस्टररोल भरे जाने के बाद फीडिंग के लिए ब्लॉक में तैनात एपीओ को मुहैया कराया। एपीओ ने कुछ मजदूरों के मस्टररोल की फीडिंग नहीं की। अतरसुइया ग्राम प्रधान ओंकार सिंह, बारा के श्री यादव और महंगूपुर के बृजराज सिंह आदि ग्राम प्रधानों का कहना है कि शेष मजदूरों के मस्टर रोल फीडिंग के लिए कई बार एपीओ से मुलाकात की गई थी। इस दौरान एपीओ फीडिंग का काम पूरा करने की बात कहते रहते। जब मजदूरी का भुगतान छह महीने तक नही हुआ तो मजदूरों ने पंचायत मित्र और ग्राम प्रधान का घेराव करना शुरू किया। 

मजदूरों को उग्र होता देख ग्राम प्रधान और पंचायत मित्र ने ब्लॉक पहुंचकर फीडिंग की हकीकत खंगाली तो वह दंग रह गए। पता चला कि 17 गांवों के 123 मजदूरों का मस्टर रोल वेबसाइट पर फीड ही नहीं किया गया। इसके चलते मजदूरों की मजदूरी खाते में नहीं पहुंच सकी। जॉबकार्ड धारकों के मस्टर रोल को फीड कराने के लिए पंचायतमित्र और ग्राम प्रधान एपीओ मनरेगा कार्यालय का चक्कर काटते रहे पर सफलता नहीं मिल सकी। मजदूरी न मिलने पर जॉबकार्ड धारक पंचायत मित्र से लेकर ब्लॉक कार्यालय का आए दिन चक्कर काट रहे हैं। जिम्मेदार हैं कि मजदूरों की मजदूरी के करीब आठ लाख 31 हजार 985 रुपये के भुगतान के बावत पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।
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