इसके बाद गिरफ्तारी के डर से योगेंद्र तिवारी का परिवार फरार हो गया लेकिन 27 फरवरी को राजू तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पूछताछ में राजू से कोई सार्थक जानकारी न मिलने पर पुलिस ने दूसरे पहलुओं पर विचार किया। प्रेसवार्ता में एसपी राजेश कुमार ने बताया कि जब अंकिता के पुराने इतिहास की जानकारी हुई तो नए सिरे से जांच की गई। दिल्ली में रामू मिश्रा के किराए के मकान में उसके होने की जानकारी मिली। इस पर दिल्ली पुलिस की मदद से उसे वहां से पकड़ लिया गया।
घटना के खुलासे के बाद पुलिस ने योगेंद्र तिवारी की तहरीर पर साजिश रचने के आरोप में अंकिता के पिता शारदा प्रसाद मिश्रा, उसके भाई गोपाल मिश्रा, रामू उर्फ संकल्प मिश्रा निवासी प्रसिद्धपुर बम्हरौली धाता फतेहपुर और मौसेरे भाई वरुण त्रिपाठी निवासी रामपुर धमावां सैनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। शारदा प्रसाद और गोपाल मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एसपी ने बताया कि जेल में बंद राजू को छोड़े जाने की रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई है।
विवाहिता के लापता होने के बाद घटना की सच्चाई को उसके मायके पक्ष के लोगों ने छिपाकर रखा। गंभीर मामले की झूठी तहरीर देकर एक बेकसूर को जेल भिजवाया। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाएगी। विवाहिता को दो दिनों पहले दिल्ली के गुरुग्राम से पकड़ने के बाद कोर्ट में बयान दर्ज कराया गया। मेडिकल परीक्षण के बाद परिवार वाले उसे अपने साथ ले गए। - राजेश कुमार, एसपी।