कौशाम्बी में पशु पालकों का हाल बेहाल है। करीब चार लाख मवेशियों के स्वास्थ्य का जिम्मा महज 10 चिकित्सकों के जिम्में है। एक चिकित्सक पर 39 हजार मवेशियों को स्वस्थ्य रखने की जिम्मेदारी है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पशुओ के स्वास्थ का क्या हाल होगा।
वर्ष 2011 की पशु गणना के मुताबिक जिले में एक लाख 63 हजार 386 गोवंश और दो लाख 84 हजार 319 महिषवंशीय पशु हैं। इन मवेशियों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए 15 राजकीय पशु अस्पताल और 24 पशुधन प्रसार केंद्रों संचालित किए जा रहे हैं। इसके सापेक्ष यहां स्टाफ की काफी कमी है। जिले 15 राजकीय पशु अस्पतालों के सापेक्ष महज 10 चिकित्सक तैनात हैं। इसी तरह फार्मासिस्ट के 15 पद के सापेक्ष महज नौ की तैनाती है। 24 पशु सेवा केंद्र में भी चिकित्सक के छह पद रिक्त हैं।
गोवंशीय और महिषवंशीय के अलावा तमाम ऐसे मवेशी (पालतू) और भी जिनका इलाज पशु अस्पताल में लोग कराने आते हैं। अब अंदाजा लगाया जा सकता है जिले में दुग्ध धारा बहाने को लेकर संचालित योजनाओं का क्या हाल होगा।
इन राजकीय पशु अस्पतालों में नहीं हैं चिकित्सक
मंझनपुर। नेवादा, सरायअकिल, चायल, सिराथू, मलीपुर महराजगंज। इसके अलावा गनपा, अजुहा, कड़ा, नेवादा, भरवारी और मूरतगंज में फार्मासिस्ट नहीं हैं।
नेवादा विकास खंड का बुरा हाल
मंझनपुर। नेवादा राजकीय पशु चिकित्सालय में न तो चिकित्सक हैं और न ही फार्मासिस्ट। यहां पशु पालक जाते हैं तो उनके मवेशियों के इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। ऐसे में यहां के मवेशियों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
पशु गणना से बढ़ेगी दिक्कत
मंझनपुर। इस बार राजकीय पशु अस्पतालों के जरिए ही पशु गणना कराई जाएगी। यह अभियान 26 नवंबर से चलेगा। ऐसे में चिकित्सक व स्टाफ गणना में गए तो समस्या काफी बढ़ सकती है।
राजकीय पशु अस्पतालों में स्टाफ की कमी से दिक्कत हैं। किसी तरह पशु पालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मवेशियों का इलाज कराया जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी नाम मात्र के रह गए हैं।
बीडी पांडेय, सीवीओ