चरवा (कौशाम्बी)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरवा और राजकीय महिला अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की अनदेखी का शिकार हो गया है। डॉक्टरों और फार्मासिस्ट के अक्सर ड्यूटी से गैरहाजिर रहने से बीमारों और दुर्घटनाग्रस्त लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। शिकायत के बाद भी डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम नहीं लगने से ग्रामीणों में जबरदस्त गुस्सा है।
चायल तहसील के चरवा बाजार और गांव की आबादी करीब 60 हजार है। इस आबादी को सस्ता और सुलह इलाज उपलब्ध कराने के लिए करीब 40 बरस पहले यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 12 बेड वाला राजकीय महिला चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। पीएचसी में इस समय दो चिकित्सक डॉ. प्रेम प्रकाश शर्मा, डॉ. पीके मिश्र और फार्मासिस्ट धर्मेश मिश्र की तैनाती है।
गांव के रवींद्र पांडेय, अनूप केसरवानी, अशोक कुमार भारतीय, साजन मौर्य, मिश्रीलाल आदि ने बताया कि डॉक्टरों, फार्मासिस्ट का अस्पताल आने और जाने का कोई समय नहीं हैं। यही हाल राजकीय महिला अस्पताल का भी है। 12 बेड वाला यह अस्पताल सिर्फ एक स्टाफ नर्स और दाई के भरोसे ही संचालित है। डॉक्टरों की इस मनमानी का खामियाजा गांववालों खासकर महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। देखें तो शुक्रवार को ही क्षेत्र के चंदईतारा गांव के समीप अपराह्न करीब एक बजे दो बाइकें आपस में टकरा गई थीं। इसमें दो महिलाएं और एक युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।
ग्रामीण घायलों को लेकर पीएचसी चरवा पहुंचे तो वहां ताला लटक रहा था। इस पर गांववालों ने घायलों का प्राथमिक उपचार एक निजी क्लीनिक में कराना पड़ा था। इससे लोगों में आक्रोश भी रहा। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार इसकी शिकायत सीएमओ से की गई। मगर वह ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस कारण डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। मामले में सीएमओ डॉ. राजकुमार मिश्र का कहना है कि सभी सीएचसी, पीएचसी के चिकित्सकों को समय से ड्यूटी पर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है। लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों की जांच करके उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की जाएगी।