जिला चिकित्सालय में 15 करोड़ की लागत से बनकर तैयार मदर एंड चाइल्ड हेल्थ केयर सेंटर (एमसीएच विंग) अधिकार की लड़ाई में फंस गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी और जिला अस्पताल चिकित्साधीक्षक के बीच यह मामला फंस गया है। यही कारण है कि आचार संहिता खत्म होने के बाद भी इसके शुरू होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। सीएमएस ने इस मामले को महानिदेशक के यहां भी पहुंचा दिया है। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। इस मामले में डीएम ने सीएमओ से नाराजगी भी जताई है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में एमसीएच सेंटर बनकर तैयार हो गया है। इसके निर्माण में 15 करोड़ रुपये खर्च हुआ है। 12 करोड़ से अस्पताल का निर्माण हुआ है, बाकी तीन करोड़ की लागत से इस अस्पताल में आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं व अन्य कार्य कराए गए हैं। भवन बनकर तैयार हो गया तो कार्यदायी संस्था ने सीएमओ को भवन स्थानांतरित कर दिया है। इसके बाद सीएमओ ने मंझनपुर पीएचसी प्रभारी डॉ. अरुण पटेल को सौ बेड के इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी सौंप दी।
इसकी जानकारी सीएमएस डॉ. दीपक सेठ को नहीं दी गई। जिला अस्पताल के भीतर बने इस आधुनिक अस्पताल का संचालन पीएचसी प्रभारी कैसे करा सकते हैं, इसको लेकर सीएमएस ने सवाल उठा दिए हैं। अधिकार क्षेत्र में हनन का मामला होने पर सीएमएस ने मोर्चा भी खोल दिया है। सीएमएस ने महानिदेशक चिकित्सा एवं कल्याण को पत्र भेजकर पूछा है कि जिला अस्पताल परिसर में बने नव निर्मित एमसीएच विंग के भवन के हस्तांतरण व उसके क्रियाशील कराए जाने की जिम्मेदारी किसकी है। महानिदेशक से सीएमएस ने इस स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है। सीएमएस के इस पैंतरे से सीएमओ कार्यालय में खलबली मच गई है। सीएमओ भी हैरान हैं। वहीं डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इस पर नाराजगी भी जताई है।