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तेज बारिश से जनजीवन ठहरा

Fri, 02 Jan 2015 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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मंझनपुर। भीषण शीतलहर, गलन और कोहरे के बाद दोआबा में बृहस्पतिवार को दिनभर झमाझम बारिश हुई। सुबह से लेकर शाम तक बरसात होने से जनजीवन प्रभावित रहा। वहीं बेमौसम हुई बारिश से गली-मोहल्लों में जगह-जगह पानी भी भर गया है। साथ ही सड़कों पर फिसलन से भी आवागमन में लोगों को परेशानी हुई। इधर, आसमान से बूंदें गिरते देख किसानों के चेहरे खिल गए। कृषि जानकारों के मुताबिक रबी की प्रमुख फसल गेहूं के लिए यह बारिश किसी अमृत से कम नहीं है।
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कौशाम्बी में 15 दिनों तक भीषण शीतलहर, गलन और कोहरे के कारण लोग परेशान रहे। इधर, बुधवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल आया। आसमान में बादलों ने डेरा जमा लिया। नववर्ष की पहली सुबह होते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। सुबह करीब 7 बजे से शुरू हुई बारिश पूरा दिन जारी रहा। दिनभर आसमान से बूंद टकपना बंद नहीं होने से जनजीवन प्रभावित रहा। ज्यादातर लोग घरों में दुबके रहे।

जिन्हें जरूरी कामों से बाहर निकलना पड़ा, वे छतरी के सहारे ही घर से निकल सके। इधर, आसमान में बादलों की मौजूदगी से तापमान में भी हल्की बढ़ोत्तरी हुई है। कौशाम्बी में मंगलवार की रात 5 डिग्री रहा न्यूनतम तापमान बढ़कर 8 डिग्री सेल्सियस हो गया है। हालांकि दिन के तापमान में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। बृहस्पतिवार को भी दिन का तापमान मंगलवार, बुधवार के बराबर ही करीब 12 डिग्री सेल्सियस रहा।
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उधर, महगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विभाग के मुताबिक बृहस्पतिवार को जिले में औसतन 4-5 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। पर, इस बेमौसम हुई बारिश के कारण गली-मोहल्लों के रास्ते कीचड़-पानी से भर गए। सड़कों पर फिसलन के कारण भी लोगों को आवागमन में दिक्कतो का सामना करना पड़ा। इन सबके बीच बरसात से किसानों के चेहरे खिल गए है। किसानों का मानना है कि गेहूं की फसल के लिए तो आसमान से अमृत ही बरसा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा अजय कुमार ने भी बताया कि यह बारिश रबी की प्रमुख फसल गेहूं के लिए विशेष फायदेमंद है। पर, इस बरसात से फूलदशा की फसलें जैसे सरसों, मटर, फूलगोभी आदि को नुकसान हो सकता है। पराग धुलने से फलन प्रभावित होगा।

कौशाम्बी में रबी के सीजन में दूसरी प्रमुख फसल आलू है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी बुआई की गई है। इधर, बृहस्पतिवार को अचानक मौसम बदल गया। दिनभर झमाझम बारिश होती रही। इस बारिश से आलू की पछेती फसलों में झुलसा रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। कृषि वैज्ञानिक डा अजय कुमार ने बताया कि यदि बारिश के बाद तापमान में हल्की सी भी तेजी आई, तो पछेती आलू झुलसा रोग की चपेट में आ सकती है। इसी तरह से मटर में भी पाउडरी मिल्ड्यू रोग और सरसों, फूलगोभी, अरहर, चना आदि फसलों में भी कोटों का प्रकोप संभव है।
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