दोआबा में हौसला पोषण योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। योजना की शुरुआत करने के बाद जिम्मेदार इसे भूल बैठे हैं। अफसरों की शिथिलता को देख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और प्रधानों ने भी योजना से हाथ खींच लिए हैं। इसके चलते गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों को गर्म पौष्टिक भोजन की जगह पंजीरी खिलाकर सेहत सुधारी जा रही है।
सूबे के मुख्यमंत्री ने कुपोषण को दूर भगाने के लिए हौसला पोषण योजना की शुरुआत की है। जिले में इसकी शुरुआत डीएम अखंड प्रताप सिंह ने अपने गोद लिए गांव से की। डीएम के साथ-साथ अन्य विभागाध्यक्षों ने भी गोद लिए गांव में योजना की शुरुआत करते हुए लम्बे-लम्बे भाषण ग्रामीणों को सुनाए लेकिन ठीक दूसरे दिन से योजना के साथ खिलवाड़ शुरू हो गया। बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म भोजन की जगह पंजीरी खिलाई जा रही है तो गर्भवती महिलाओं को कभी केंद्रों पर बुलाया ही नहीं जा रहा।
इस योजना में जमकर लूट मची है। उदाहरण के तौर पर अषाढ़ा आंगनबाड़ी केंद्र को लिया जा सकता है। पिछले दिनों अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के निरीक्षण में पता चला कि केंद्र पर आए तीन बच्चों को सहायिका ने पंजीरी खिलाकर बैठा रखा है। दूसरी ओर गांव की एक भी गर्भवती महिला को केंद्र पर नहीं बुलाया गया। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य सुधारे जाने के लिए खाते में आई रकम आखिर कहां खर्च हो रही है। उधर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री के खिलाफ जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
हौसला पोषण मिशन को सफल बनाने के लिए अफसरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। योजना के संचालन को लेकर जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
अखंड प्रताप सिंह, जिलाधिकारी