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फसल का गम, निकला दो किसानों का दम

Mon, 20 Apr 2015 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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मंझनपुर/मूरतगंज।  आसमान से बरसी आफत से बर्बाद हुई फसलों के सदमे में कौशाम्बी के किसानों की जान जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को भी मंझनपुर तहसील के भद्दुरपुर गांव के किसान शिव किंकर पांडेय (60) और चायल तहसील के मकदूमपुर काजी गांव के जगदेव (55) की मौत हो गई। दोनों किसान मौसम की मार से तबाह हुई फसलों को लेकर परेशान थे।
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कौशाम्बी के मंझनपुर तहसील क्षेत्र के भद्दुरपुर गांव निवासी शिव किंकर पांडेय (60) करीब 20 बीघा जमीन के काश्तकार थे। पूरे खेत में उन्होंने गेहूं की बुआई की थी। छोटे भाई भैयालाल ने बताया कि मार्च और अप्रैल में हुई बेेमौसम की बारिश से पूरी फसल तबाह हो गई थी। खेत में फसल की बर्बादी की स्थिति इतनी खराब थी, कि कोई मजदूर इसे काटने, माड़ने को तैयार नहीं था। इसी को लेकर शिवकिंकर कई दिनों से परेशान थे। बताया कि शनिवार की सुबह वह खेत की ओर गए थे। लौटकर आने पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। गिरकर अचेत हो गए।

घबराए परिजन उन्हें इलाज के लिए इलाहाबाद के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया। जहां रविवार की दोपहर उनकी सांसें थम र्गइं। घरवालों के मुताबिक बर्बाद हुई फसल के सदमे में ही उनकी मौत हुई है। किसान की मौत की खबर लगते ही मंझनपुर एसडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह भी गांव पहुंचे। उन्होंने बर्बाद हुई फसल के मुआयने के साथ ही पीड़ित परिवार के लोगों से भी बातचीत की। एसडीएम ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। पीड़ित परिवार को मदद दिलाई जाएगी। उधर, रविवार को ही चायल तहसील के मकदूमपुर काजी गांव के किसान जगदेव (55) की भी सदमे में मौत हो गई। जगदेव के बेटे रामराज ने बताया कि करीब आठ बीघा खेत बंटाई पर लिया है। तीन बीघे में हिरमंजी और पांच बीघे में गेहूं की बुआई की गई थी। मौसम की मार से गेहूं और हिरमंजी दोनों फसल बर्बाद हो गई है। जिसका गम उनके पिता सहन नहीं कर सके।
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भद्दुपर गांव के किसान शिवकिंकर तीन भाई थे। तीनों भाइयों के हिस्से में 20-20 बीघा जमीन है। तीनों भाई खेती करते हैं। यही खेती ही उनके कुनबे की जीविका का सहारा है। शिवकिंकर भी अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर खेती करता था। इसके लिए उसने पत्नी ऊषा देवी के नाम बैंक से ऋण लेकर ट्रैक्टर भी खरीद लिया था। पत्नी के नाम अभी भी 2.95 लाख रुपये का ट्रैक्टर ऋण बकाया है। इतना ही नहीं गेहूं की बुआई के लिए बहू सुनीता देवी और बेटे अनुराग के नाम पर भी केसीसी से 1.56 लाख रुपये का ऋण लिया गया था। सदमे से हुई मौत के बाद बिलखते हुए पत्नी ने बताया कि कोशिश थी कि गेंहू की अच्छी पैदावार होगी, तो ज्यादा से ज्यादा लोन भर दिया जाएगा। पर, भगवान ने कहर ढा दिया। बेमौसम बारिश से सबकुछ बर्बाद हो गया है।
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