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फांसी बरकरार, आगे भी यही दरकार

Sat, 06 May 2017 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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Demo pic - फोटो : google
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दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया कांड के आरोपियों की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है। टीवी देख रही कौशाम्बी की महिलाओं को इससे काफी सुकून मिला। इस खबर के बाद वे यह सोचने के विवश हो गई हैं कि दो माह के भीतर जिले में जिस तरह से छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं हुईं क्या उनके आरोपियों को भी सरकार कोर्ट में कड़ी सजा दिलाने के लिए कदम उठाएगी।
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 सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर मंझनपुर के चकनगर की वैदही गुप्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया कांड के आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। देश की सबसे बड़ी अदालत से उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी। वैदही का मानना है कि कौशाम्बी में दो माह के भीतर तमाम घटनाएं हुईं। छात्रा रचना सिंह प्रकरण वह भुला नहीं पा रही है।

छेड़खानी का शिकार पीड़िता ने फांसी लगा ली थी। क्या उसके आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी? उनका यही कहना है कि इस मामले में भी सरकार ऐसी पैरवी करे ताकि आरोपियों को सजा मिल सके। समाजसेवी निधि त्रिपाठी महिला प्रकोष्ठ की सदस्य हैं। उनका कहना है कि निर्भया कांड पर आया फैसला सही है। निधि कहती हैं कि कौशाम्बी में संजू देवी व रचना सिंह प्रकरण भी सबकी जुबान पर है। इस मामले में भी पुलिस के पैरोकार और सरकारी वकील को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा तभी आरोपियों को कड़ी सजा मिलेगी।
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इस मामले में अब पैरोकारों को ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। कहा कि निर्भया कांड महिलाओं के लिए खौफ बन चुका था लेकिन अब कोर्ट का फैसला अपराधियों के लिए खौफ बन जाएगा। ऐसी मिसाल कौशाम्बी में भी बननी चाहिए। समाज सेवी बलवीर सिंह चौहान का कहना है कि फैसले का स्वागत है। जिस तरह से निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी उसकी सजा इससे कम नहीं हो सकती। सालों बाद भी निर्भया की घटना जेहन से नहीं उतर रही है। फांसी की सजा होने पर सुकून मिला है।

बलवीर सिंह चौहान कहते हैं कि डेढ़ माह पहले सरेराह एक छात्रा से छेड़खानी हुई थी। इस प्रकरण में पुलिस टालमटोल कर रही थी। छात्रा ने एएसपी से सीधे मोबाइल पर बातचीत की तो पुलिस हरकत में आई। कहा कि इस प्रकरण में भी अब कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

निर्भया कांड पर फैसला आने के बाद से छात्रा रचना सिंह और संजू देवी के परिजन भी सहमत हैं। उनका भी कहना है कि उनके मामले में भी शासन और प्रशासन इतनी मजबूती से अपना पक्ष रखे कि कोर्ट इसी तरह की कड़ी सजा सुनाए ताकि कोई इस तरह की हरकत करने का दुस्साहस न कर सके। बता दें कि रचना सिंह व संजू देवी के साथ छेड़खानी हुई थी। घटना के बाद दोनों छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी।
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