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पांच हजार हैंडपंप खराब, पानी के लिए मारामारी

Tue, 09 May 2017 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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मई माह के पहले पखवारे में बदन को झुलसा रही गर्मी ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। भीषण गर्मी में हैंडपम्प खराब होने से गांवों में सूख रहे हलक को तर करने के लिए गांव के दूसरे लोगों पर निर्भर होना पड़ रहा है। प्रशासन है कि दगा दे चुके खराब हैंडपंपों का रिबोर कराने के लिए बजट के इंतजार बैठा है। हैंडपंपों के पानी न देने से गांवों में बूंद-बूंद पानी के लिए मारामारी है।
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मई माह के पहले पखवारे में गर्मी सारे रिकार्ड तोड़ने को बेताब दिख रही है। रविवार की शाम इतनी गर्म रही कि लोगों को कूलर व एसी में भी राहत नहीं मिल रही थी। ऐसे हालात में ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के संकट से जूझना पड़ रह है। विभागीय आंकड़ाें पर जाएं तो 498 ग्राम सभाओं में पेयजल जल मुहैया कराने के लिए लगे 25 हजार हैंडपंपों में 20 फीसदी का बोर ब्रस्ट है। इनके अलावा दो से तीन फीसदी हैंडपंप यांत्रिक या फिर अन्य खराबी के चलते ठप पड़े हैं। गांवों में जिन मोहल्लों के हैंडपंपों का बोर ब्रस्ट है वहां के लोगों को दूसरे मोहल्ले में लगे हैंडपंपों पर घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है।

बदन झुलसा देने वाली धूप में लोगों को एक बाल्टी पानी जुटा पानी भारी पड़ रहा है। बानगी के तौर पर सदर ब्लॉक के टेनशाह आलमाबाद व भटपुरवा गांव को लिया जा सकता है। दोनों गांव डार्क श्रेणी से बाहर हैं। इसके बादवजूद यहां लगे दो दर्जन से अधिक हैंडपंप पानी नहीं उगल रहे। हैंडपम्पों के खराब होने से पेयजल जुटाने में ग्रामीणों के बदन का पानी सूख रहा है। प्रशासनिक जिम्मेदार हैं कि वह हाथ पर हाथ रखकर बजट के इंतजार में बैठे हैं। कुछ लोगों तो पड़ोसी अपने सबमर्सिबल से पानी दे देते हैं तो कुछ को मील भर दूर लगे हैंडपंप से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है। ऐसे में बूंद-बूंद पानी जुटाने के लिए ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है।
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