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जाना था करारी, एंबुलेंस चालक जा रहा था मंझनपुर गाड़ी में गूंजी किलकारी

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Had to go, the ambulance driver was going to Manjhanpur; - फोटो : KAUSHAMBI
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जीवन दायिनी सरकारी एंबुलेंस सेवा अब भगवान भरोसे है। हड़ताल कर रहे एंबुलेंस कर्मियों से चाबी लेकर ई-रिक्शा चालकों को गाड़ी की सौंप दी गई। चालकों को न तो अस्पताल की सही लोकेशन पता है और न ही फर्स्ट एड की जानकारी।
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ऐसा ही एक मामला बृहस्पतिवार को करारी में सामने आया। शाहपुर टिकरी की प्रसव पीड़िता को लेकर आशा करारी पीएचसी जा रही थी, लेकिन चालक जिला अस्पताल के लिए निकल पड़ा। नतीजतन प्रसूता ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया।
परिवार के लोगों ने हल्ला मचाया तो एंबुलेंस चालक करारी पीएचसी पहुंचा। गनीमत रही कि अस्पताल के स्टॉफ ने समय रहते जच्चा-बच्चा को मुकम्मल इलाज दिया। अब दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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सपा सरकार के कार्यकाल में जीवन दायिनी 108, 102 व एएलएक्स सेवा का शुभारंभ किया गया था। मरीज के एक फोन पर तत्काल पर एंबुलेंस की सुविधा मिलती थी। लेकिन यही सुविधा अब लोगों की मुसीबत बनती जा रही है।
28 जुलाई को एंबुलेंस सेवा के रीजनल मैनेजर धीरज यादव ने सारी एंबुलेंस चालकों से गाड़ी की चाबी ले ली। ईएमटी को भी हटा लिया गया। बाद में सेवा संचालित रखने के लिए प्राइवेट वाहन चालकों को गाड़ी की चाबी सौंप दी गई।
नतीजतन जिले में चलने वाली 108 की 22, 102 की 28 और एएलएक्स की तीन एंबुलेंस बेपटरी हो गई हैं। इन एंबुलेंस में काम करने वाले 207 कर्मचारियों को काम से हटा दिया है। इसका दुष्परिणाम अब सामने आने लगा है। बृहस्पतिवार को शाहपुर टिकरी गांव की ननकी पत्नी घनश्याम को प्रसव पीड़ा हुई। परिवार के लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया। फोन करने के काफी देर बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
घनश्याम के मुताबिक वह लोग पीएचसी करारी के लिए घर से निकले थे। लेकिन चालक ने जिला अस्पताल के लिए गाड़ी मोड़ दी। इधर, ननकी की हालत दर्द से बिगड़ती जा रही थी। विवाहिता के साथ रहे लोगों ने चालक से शिकायत की तो उसने करारी का रास्ता नहीं पता होने की जानकारी दी।
बाद में परिवार की महिलाओं ने रास्ता बताया तो चालक करारी के लिए निकला। इस बीच रास्ते में ही ननकी ने बेटी को जन्म दिया। बाद में चालक ग़ाड़ी लेकर करारी पीएचसी पहुंचा तो वहां रहे स्टॉफ ने जच्चा-बच्चा का इलाज किया।
एंबुलेंस ने नहीं बाइक पर आ रहे मरीज
जिला अस्पताल से रोजाना 30 से 40 मरीज प्रयागराज के लिए रेफर किया जाता है। इसके अलावा चार सौ के करीब मरीज ओपीडी के लिए विभिन्न अस्पतालों से जिला अस्पताल आते थे। एंबुलेंस सेवा ठप होने के कारण अब यह संख्या घटकर सौ के करीब हो गई है।
लाइट का है लाइसेंस, चला रहे हैवी वाहन
एंबुलेंस सेवा के अध्यक्ष रमेश पाल का कहना है कि 28 जुलाई से उन लोगों से सारी एंबुलेंस की चाबी रीजनल मैनेजर धीरज यादव ने ले ली है। नियम के मुताबिक एंबुलेंस चलाने वाले चालकों का हैवी लाइसेंस होना चाहिए। पर, यहां ई-रिक्शा चालकों को गाड़ी की स्टेयरिंग थमा दी गई है। अब ऐसे में मरीजों की जान सिर्फ भगवान भरोसे है।
मरीजों की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। प्रयास है कि किसी मरीज को दिक्कत नहीं होने पाए। परिवहन विभाग से संपर्क कर एंबुलेंस चालकों की व्यवस्था की गई है। फिलहाल अभी कही से कोई समस्या नहीं आ रही है।
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केसी राय, सीएमओ

Had to go, the ambulance driver was going to Manjhanpur;- फोटो : KAUSHAMBI

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