मंझनपुर। ग्रामसभाओं की खुली बैठक अब बंद कमरे में नहीं कराई जा सकेगी। इसे लेकर शासन का मिजाज सख्त होने पर जिले के अफसर भी संजीदगी दिखाने लगे हैं। 15 से 25 जून के बीच होने वाली इन बैठकों को ग्रामीणों की बैठक में बरामदे अथवा बाग में कराने का निर्देश सीडीओ ने दिया है। साथ ही उन्होंने बैठक के लिए अफसरों को नामित कर दिया है।
बता दें कि पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 11 और उप धारा (1) में प्राविधान है कि ग्राम सभाओं में खरीफ की फसल कटने के तुरंत बाद खुली बैठक कराई जाए। इसी तरह रबी की फसल कटने के बाद भी बैठक कराने का नियम है। नियमों का उल्लंघन करके ग्रामसभाओं के जिम्मेदार अभी तक कागजों में ही खुली बैठक करा लेते थे। कमरे के भीतर बैठक करके मनमाफिक प्रस्ताव बनाकर इसमें सदस्यों की मुहर भी लगवा लेते थे। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम विकास विभाग के अफसर, कर्मियों की इसी मनमानी से विकास कार्यों में जमकर अंधेरगर्दी भी देखने को मिलती है। ग्रामीण विकास में मनमानी की लगातार मिलने वाली शिकायतों के मद्देनजर ही इस बार शासन ने कड़ा रूख अख्तियार किया है।
निर्देश है कि सभी ग्रामसभाओं में 15 से 25 जून के बीच अनिवार्यरूप से बैठक हो जानी चाहिए। खुली बैठक हो और उसके जिलास्तरीय अफसरों की भी मौजूदगी अनिवार्य की गई है। शासन से आए इस दिशा निर्देश पर प्रभारी सीडीओ ने डीआरडीए के पीडी, डीपीआरओ, सीवीओ, डीएसओ, विकलांग कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, प्रोबेशन अधिकारी, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी के अलावा सभी खंड विकास अधिकारियों और खंड शिक्षाअधिकारियों समेत तकरीबन दो दर्जन अधिकारियों को ग्रामसभा की खुली बैठक कराने के लिए नामित किया है। इस सख्ती को लेकर प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की नींद उड़ी हुई है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि पंचायती चुनाव के वर्ष में होने वाली इस बैठक में वे विपक्षियों का सामना कैसे करेंगे?