करारी। गंगा दशहरा पांच जून को है। इस बार रवि और सिद्ध योग का विशेष संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान व दान करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गंगा दशहरा पर जिले में गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ जुटती है।
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष में दशमी तिथि को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक राजा भगीरथ ने अपने 60 हजार पुरखों को तारने के लिए मां गंगा की वर्षो तक कठोर तपस्या की थी। तपस्या से खुश होकर मां गंगा इसी दिन पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
शास्त्रों के मुताबिक गंगा का पानी अमृत समान और मोक्षदायिनी है। इस दिन गंगा दरस, परस, मज्जन और स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पांच जून को गंगा दशहरा के दिन भोर से ही जिले के कड़ा, संदीपन, पल्हाना, फतेहपुर, ककराबाद और बजाज समेत अन्य घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ जुटने की संभावना है।
पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार, गंगा दशहरा पर रवि और सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। रवि योग दिनभर रहेगा। इसके साधक को सेहत में लाभ मिलता है। वहीं, सिद्धि योग सुबह 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इससे मन्नतें पूरी होती हैं।
गंगा दशहरा मुहूर्त
पं. ज्ञानेन्द्र शास्त्री ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 04 जून को देर रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगी और अगले दिन 06 जून को देर रात 02 बजकर 15 मिनट पर तिथि का समापन होगा। इस प्रकार 05 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा।
इन वस्तुओं का करें दान
गंगा दशहरा पर गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा पर दान की जाने वाली वस्तुओं की संख्या 10 होनी चाहिए। इस दिन 10 फल, 10 पंखे, 10 सुराही, 10 छाते या 10 हिस्से अन्न का दान कर सकते हैं।