करारी। सहालग शुरू होते ही फल और ड्राई फ्रूट्स (सूखे मेवों ) की मांग तेजी से बढ़ गई है। इसका सीधा असर बाजार पर नजर आ रहा है। खासकर गिफ्ट पैकिंग में ड्राई फ्रूट्स का उपयोग बढ़ने से थोक और खुदरा दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। जहां फल और सूखे मेवों की मांग में तेजी आई है, वहीं पैकेजिंग का कारोबार भी परवान चढ़ता दिखाई दे रहा है। फल और ड्राई फ्रूट्स की आकर्षक पैकिंग लोगों को खासा लुभा रही है।
शादी-विवाह के मौसम में तिलक, गोदभराई, रिंग सेरेमनी आदि कार्यक्रमों में कपड़ा, मिठाई के साथ फल व सूखे मेवे देने की परंपरा है। इस समय फल व मेवा की पैकेजिंग का धंधा तेजी से चल रहा है। थोक बाजार में दाम फिर भी नियंत्रित हैं, लेकिन फुटकर बाजार में दामों में काफी उछाल आया है। फुटकर फल विक्रेता राजू केसरवानी ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में फलों की बिक्री अधिक हो रही है।
फल विक्रेता मैसर और लाला राइन ने बताया कि सामान्य दिनों में जो फलों की टोकरी 500 से 600 रुपये में तैयार होती थी, वह अब 700 से 800 रुपये में तैयार हो रही है। पहले 90 रुपये किलो बिकने वाला सेब अब 120 से 130 रुपये तक बिक रहा है। इसी तरह अनार का दाम पहले 100 रुपये प्रति किलो था, जो अब 120 रुपये तक पहुंच गया है। ड्राई फ्रूट्स में काजू के विभिन्न ग्रेड और मखाने की अलग-अलग वैरायटी बाजार में उपलब्ध हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा बादाम, अखरोट और पिस्ता की खरीद भी बढ़ी है। लेकिन, काजू और मखाना अब भी शीर्ष पर हैं।
किराना दुकानदार उधोश्याम केसरवानी ने बताया कि शादी-विवाह में ड्राई फ्रूट्स देने और गिफ्ट पैक में शामिल करने की परंपरा बढ़ने से महंगाई बढ़ रही है, जबकि ठंड के कारण भी इसकी मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। ड्राई फ्रूट्स के मिश्रित पैक भी बाजार में उपलब्ध हैं। तौल और पैकिंग के हिसाब से इनका भाव एक से लेकर चार हजार रुपये तक है। दुकानदारों के अनुसार, दो हजार से तीन हजार रुपये तक के पैक लोगों को अधिक पसंद आ रहे हैं।
फलों और ड्राई फ्रूट्स में पैकेजिंग को विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि जितनी आकर्षक पैकिंग होती है, दाम भी उतना ही अधिक होता है। इससे पैकेजिंग का कारोबार भी बढ़ा है। ऋतिक ने बताया कि प्लास्टिक की डलिया से लेकर तसले व स्टील के थालियों में ड्राई फ्रूट पैकेजिंग लोग करवा रहे हैं। सभी पैकेजिंग का रेट अलग-अलग है।