उमसभरी गर्मी से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव का असर अब सेहत पर भी दिखने लगा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में इन दिनों मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, रोजाना 150 से अधिक मरीज इलाज कराने आते हैं जिसमें से 40 से अधिक इन्ही बीमारियों से परेशान होते हैं।
शनिवार को मेडिकल कॉलेज के मुख्य अस्पताल में हड्डीरोग विभाग की ओपीडी में विशेषज्ञ डॉ. गौरव मेहदी रत्ता ने बताया कि गर्मी के मौसम में लगातार पसीना निकलने से शरीर से पानी और खनिज लवण (सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम) तेजी से कम हो जाते हैं। इसकी वजह से मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द की शिकायत आम हो जाती है। उन्होंने कहा कि अधिकतर मरीज घुटनों, कंधों, गर्दन और कोहनियों में दर्द की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा, संतुलित आहार न लेने और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने बताया, लगातार पसीना निकलने से शरीर में विटामिन और मिनरल्स की भी कमी हो जाती है जिससे थकान, कमजोरी और ऐंठन बढ़ जाती है। कई मरीजों को चलने-फिरने में कठिनाई तक होने लगती है।
डॉ. पंकज तिवारी ने लोगों को सलाह दी कि गर्मी के दिनों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और समय-समय पर नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी जैसे प्राकृतिक पेय का सेवन करें। साथ ही संतुलित आहार और हल्की एक्सरसाइज को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांसपेशियों के दर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं है, समस्या बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
अब युवा भी हो रहे जोड़ों के दर्द के शिकार
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हड्डीरोग के डॉ. राहुल भारतीय ने बताया कि मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं और किशोरों में भी तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय तक धूप में काम करने वाले मजदूर, किसान और शारीरिक श्रम करने वाले लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि दर्द और ऐंठन को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। अगर समय रहते जांच और इलाज न कराया जाए तो समस्या और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान लापरवाही गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। समय पर जांच, सही खानपान और सावधानी बरतकर इस समस्या से बचा जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज में हड्डी विभाग की ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद