बारा। कौशाम्बी में कालिंदी यानी यमुना तट पर बसे दाई का पुरा गांव में इन दिनों भागवत कथा गूंज रही है। बुधवार को कथा का वाचन चित्रकूट से आए आचार्य लक्ष्मण प्रसाद ने किया। उन्होंने सुदामा चरित्र की कथा लोगों सुनाई। कृष्ण-सुदामा प्रसंग के आध्या?त्मिक महत्व को श्रोताओं के सामने रखा। सीख दी कि धर्म मुताबिक आचरण से ही सुदामा की तरह मोक्ष हासिल किया जा सकता है।
कौशाम्बी के दाई का पुरा गांव में आठ दिनों से भागवत कथा चल रही है। चित्रकूट से आए आचार्य लक्ष्मण प्रसाद अपनी मंडली के साथ संगीतमय कथा का वाचन कर रहे हैं। कथा के आखिरी दिन बुधवार को उन्होंने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। बताया कि कृष्ण और सुदामा बचपन के साथी थी। संदीपन गुरू के यहां शिक्षा-दीक्षा लेने के बाद दोनों अपनी-अपनी दुनिया में रम गए।
समय के साथ सुदामा की माली हालत बिगड़ने लगी। इस पर उनकी पत्नी सुशीला ने उन्हें अपने बचपन के सखा कृष्ण से जाकर मिलने के लिए प्रेरित किया। आचार्य ने कहाकि आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो सुदामा की पत्नी सुशीला बुद्धि है। बुद्धि की प्रेरणा से ही जीव यानी सुदामा भगवान से मिलते हैं। कथा का मर्म समझाते हुए आचार्य ने कहाकि गुरू और बुद्धि ही वे दो माध्यम हैं, जो ईश्वर प्राप्ति का रास्ता सुगम बनाते हैं। कहाकि भागवतकथा के एकादश स्कंध में आकाश, पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल जैसे 24 गुरुओं का वर्णन मिलता है। जिनसे मनुष्य कुछ न कुछ सीखता है। यही सीख उसे अच्छे चरित्र निर्माण की ओर ले जाती है। सुदामा चरित्र के बाद उन्होंने भागवत कथा श्रवण के महत्व की भी जानकारी श्रोताओं को दी। कहाकि राजा परीक्षित ने 7 दिन तक भागवत कथा सुनी थी। इसी से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस मौके पर पुरोहित नागेश द्विवेदी के अलावा रमेश मिश्र, अरुण द्विवेदी, श्याम द्विवेदी, सत्य नारायण, ज्ञानेंद्र पांडेय, राजेंद्र प्रसाद पांडेय आदि मौजूद रहे।