कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के उरई के मजरा पहड़िया से जरूरी सुविधाएं नदारद हैं। पहड़िया गांव के लोगों आज भी कुएं का पानी पीते हैं। करीब 50 घर की इस बस्ती में न तो खंड़जा है, न ही नाली है। कीचड़ भरे रास्ते से लोग आवागमन करते हैं। एक हैंडपंप है, जो ठप है। धरना-प्रदर्शन के बाद भी गांव की स्थिति नहीं सुधरी तो यहां के लोगों ने मतदान के बहिष्कार का एलान कर दिया।
बिजली पहुंचने के बाद भी पहड़िया गांव के लोगों की स्थिति नहीं सुधर सकी है। 50 घर की इस बस्ती में विनोद निरंकारी के घर के सामने एक हैंडपंप लगा था, जो ठप हो गया है। अब यहां मवेशी बांधे जाते हैं। पेयजल का एक मात्र जरिया है कुआं। कुएं के ही पानी से लोगों की जिंदगी कट रही है। गर्मी के दिन में यह कुआं भी सूख जाता है। इस कुएं में गर्मी के दिनों में सबमर्सिबल से पानी भरवाया जाता है। इसके बाद लोगों को पानी मिलता है। गांव में नाली, खंड़जा नहीं है। अगल-बगल के गांवों का विकास हो गया, लेकिन यह बस्ती पिछड़ी की पिछड़ी ही रह गई। इससे नाराज गांव के लोगों ने मतदान के बहिष्कार का एलान किया है। गांव की विजय लक्ष्मी, गीता देवी, कमली, रूपा, किरन, रामप्यारी, राजकली आदि का कहना है कि वह वोट क्यों दें। जब नेता हमारी सुन ही नहीं रहे तो मतदान करने का मतलब क्या है?