एसओजी व सदर कोतवाली पुलिस ने ओसा नहर के पास से कार सवार पांच गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार से 47.950 किग्रा गांजा बरामद करने का दावा किया है। बरामद गांजा की कीमत तकरीबन सात लाख रुपये आंकी जा रही है। शुक्रवार को पुलिस ने कार सवार तस्करों का चालान कर दिया गया है।
पुलिस ऑफिस में प्रेसवार्ता के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर ने बताया कि शुक्रवार को मंझनपुर इंस्पेक्टर मनीष पांडेय व एसओजी प्रभारी संजय गुप्ता को खबर मिली कि कुछ अंरतरराज्यीय गांजा तस्कर एक कार में गांजा लादकर उसे कहीं बेचने जा रहे हैं।
इस पर पुलिस टीम ने ओसा नहर के पास चेकिंग लगा दी। चेकिंग के दौरान कार एवं दो पहिया सवार पांच लोगों को पकड़ा गया। उनके पास से 47 किलो 950 ग्राम गांजा बरामद हुआ है। पकड़े गए तस्करों की पहचान सरायअकिल कोतवाली के चित्ता हर्रायपुर गांव निवासी अभिषेक पांडेय पुत्र विनय पांडेय, सरायअकिल कस्बे के अभिषेक सोनी पुत्र मनोज सोनी, बसुहार गांव के प्रमोद मिश्रा पुत्र श्याम मिश्रा, कोखराज कोतवाली के चमरूपुर निवासी मंदीप यादव पुत्र लालजी और सदर कोतवाली के कोतारी पश्चिम गांव निवासी शेरा यादव पुत्र लाखन के रूप में हुई है।
तस्करों के पास से बरामद गांजा की कीमत सात लाख रुपये बताई गई है। एएसपी ने बताया कि गिरफ्तारी में शामिल इंस्पेक्टर मनीष पांडेय, एसओजी प्रभारी संजय गुप्ता, एसआई ओम नारायण गौतम, एचसीपी राजेंद्र कुमार, सुरेंद्र सिंह, आरक्षी मनोज यादव, मनीष कुमार, विजय कुमार यादव, धर्मेंद्र कुमार, अरुणेश कुमार व सुनील कुमार को 15 हजार नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है।
पुलिस पर सत्ता की हनक दिखाता था माफिया अभिषेक
गांजा तस्करी में पकड़ा गया माफिया अभिषेक पुलिस पर सत्ता की हनक दिखाता था। वह अपनी कार में हूटर लगाने के साथ ही वीआईपी लिखाकर चलता था। भाजपा नेता के परिवार के ताल्लुख रखने के कारण पुलिस उसे पकड़ने में कतराती थी। पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो अभिषेक तीन दिन पहले ही पकड़ लिया गया था। इसके बाद उसे छुड़ाने के लिए सफेदपोशों ने पूरी ताकत लगा दी। मामला अखबारों की सुर्खियां में आया तो पुलिस को उसकी गिरफ्तारी दिखानी पड़ी।
तमंचे के साथ सोशल मीडिया में वीडियो हुआ था वायरल
गांजा तस्करी में पकड़े गए अभिषेक पांडेय का तमंचे के साथ एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। यह वीडियो एक रैली के दौरान बना था। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में भी लिया। बाद में सत्ता पक्ष के दबाव के कारण उसे छोड़ना पड़ा था।