नक्सलियों के हमले में अर्धसैनिक बल के जवान चंद्रमणि की शहादत ने चरवा (अयोध्या का पुरा) गांव की बहू साधना का सबकुछ छीन लिया है। गोलियां से छलनी पति का पार्थिव शरीर देखते ही एकबारगी तो साधना अपनी सुध-बुध गवां बैठी थी। शरीर से लिपटकर काफी देर तक सिसकने के बाद वह बुत बन गई थी। होश में आने पर सिसकते हुए कभी वह उनका चेहरा सहलाती, तो कभी दहाड़े मार-मारकर बिलखने लगती। बार-बार वह उन्हें यह कहकर उठाने की असफल कोशिश करती कि...उठो! अब कौन खाएगा मिठाई, चाय...। साधना का यह गम देख मौजूद हजारों की भीड़ भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। उसे ढांढस बंधाने वाले भी सिसक उठते थे।
चरवा के अयोध्या का पुरा गांव निवासी चंद्रमणि यादव ने चरवा खुर्द स्थित मां गायत्री शिक्षा मंदिर से आठवीं तक की पढ़ाई की थी। हाईस्कूल उसने महगांव इंटर कालेज और 12 वीं की पढ़ाई इंटर कालेज शेरगढ़ से की थी। कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक चंद्रमणि वर्ष 2004 में सीआरपीएफ में बतौर रेडियो आपरेटर भर्ती हुआ था। इसके बाद वर्ष 2009 में सैनी कोतवाली के साखा गांव निवासी रामविशाल यादव की बेटी साधना से उसकी शादी हुई थी। चंद्रमणि-साधना के दो बच्चे सृजल (6) और शौर्य (6 माह) हैं। अभी 40 दिन पहले ही वह महीनेभर की छुट्टी पर घर रहकर ड्यूटी पर वापस गया था। साथ ही पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों से जल्द ही दुबारा छुट्टी लेकर घर आने का वादा भी किया था। पर, समय के क्रूर हाथों ने परिजनों से किया उसका वादा पूरा नहीं होने दिया। शनिवार को नक्सलियो ने गोलियों से न सिर्फ चंद्रमणि का शरीर छलनी किया था, बल्कि साधना की सारी खुशियां, उसके अरमान भी तार-तार कर डाले। सीआरपीएफ के जवान जैसे ही ताबूत लेकर घर पहुंचे। वह दहाड़े मारकर बिलखते ही पति को जी भर के देखने को बाहर की ओर भागी। उसका गम, दर्द और आंसू देखकर हजारों में ऐसा कोई नहीं था जिसकी आंख भर न आई हो...जिसका दिल न रोया हो...