चार बीघे में 40 के बजाय 4 कुंतल गेहूं की पैदावार का सदमा गौसपुर पुरामुफ्ती का किसान आशुतोष नारायण (32) बर्दाश्त नहीं कर सका। मड़ाई के बाद घर लौटे युवक ने घर के भीतर फंदे से लटककर जान दे दी। खलिहान में रही मां शाम को घर लौटी तो बेटे का शव लटकता देख वह चीखने-चिल्लाने लगी। मां के अलावा ग्राम प्रधान का भी मानना है कि मौसम की मार से बर्बाद हुई खेती के सदमे में ही उसने जान दी है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसडीएम ने बताया कि मौत की सूचना मिली है। राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को भेजकर सच्चाई खंगाली जा रही है।
बेमौसम की बारिश से चौपट हुई गेहूं की पैदावार इतनी कम है कि सदमे में लगातार किसानों की मौत हो रही है।
बृहस्पतिवार को भी चायल तहसील के गौसपुर (पुरामुफ्ती) गांव के किसान आशुतोष नारायण शुक्ल ने खुदकुशी कर ली। पैर से नि:शक्त आशुतोष के पिता इंद्रनारायण की 7 साल पहले मौत हो गई थी। तीन भाईयों में सबसे छोटा आशुतोष ही मां के साथ गांव में रहता था। उसके दोनों भाई परिवार समेत सूरत में रहते हैं। शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में ही वे घर आते हैं। आशुतोष खेती से ही मां और अपना खर्च चलाता था। मां विद्यावती ने बताया कि तीनों भाईयों के बीच 4 बीघा खेत है। पूरे खेत में गेहूं की खेती की गई थी। मौसम की मार से पूरी फसल गिरकर बर्बाद हो गई। कटाई कराकर बृहस्पतिवार शाम ट्रैक्टर से मड़ाई की गई।
4 बीघे में मुश्किल से 4 बोरा ही गेहूं निकला जबकि पिछले साल 40 कुंतल से भी अधिक पैदावार हुई थी। इतनी कम पैदावार देख आशुतोष घंटे भर तक खलिहान में ही गुमशुम बैठा रहा। फिर चुपचाप उठकर घर चला गया। देर शाम जब मां खलिहान से लौटी तो घर के भीतर उसकी फंदे से लाश लटक रही थी। मां का मानना है कि कम पैदावार के गम में ही उसके बेटे ने जान दी है। सूचना पर पहुंची पुरामुफ्ती पुलिस ने छानबीन के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में एसडीएम रजनीश मिश्र ने बताया कि घटना की जांच कराई जा रही है।