किसान राजनीति से ऊब चुके हैं। पक्ष व विपक्ष दोनों से वह खफा हैं। किसानों का कहना है कि मोदी सकार ने ऐलान किया था कि नुकसान होने पर उन्हें लागत से ढाई गुना दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि आलू की फसल बर्बाद हो चुका है। भारी नुकसान हुआ है। अब उन्हें सरकार ढाई गुना लागत का दे। कहा कि इसमें वह राजनीति नहीं चाहते हैं, केवल अपना हक मांग रहे हैं।
परसिद्धपुर के किसान गिरीश चंद्र मिश्र राजनीति के नाम पर आपे से बाहर हो जाते हैं। वह दिव्यांग हैं। बुधवार को राजबब्बर से मिलने गए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। उनका कहना है कि आलू खेती में उन्हें नुकसान हुआ है। लागत नहीं मिल पा रही है। सरकार से अब उन्हें ढाई गुना मुआवजा चाहिए। कैसे मिलेगा और कौन देगा, इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है। मोचारा के किसान शिवसरन सिंह के पास 14 बीघा खेती है।
शिव सरन ने बताया कि सोसायटी से उन्होंने कर्ज ले रखा है। आलू की खेती में जितनी लागत लगी है, उसकी 30 फीसदी भी रकम उनको वापस नही मिली। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। नोटबंदी की वजह से ऐसा हुआ है। सरकार उन्हें मुआवजा दे। धर्मसिंह छह बीघा के काश्तकार हैं। उनका कहना है कि एक लाख 15 हजार कर्ज है। इसकी भरपाई वह कैसे करेंगे, इसको लेकर चिंतित है। आलू के साथ पिछले साल धान में भी नुकसान हुआ है। राजेंद्र सिंह का कहना है कि छह बीघा खेत में एक लाख 40 हजार की लागत का उन्होंने आलू तैयार किया था। 66 हजार रुपया वापस हुआ है।
बाकी रकम डूब गई। छोटे साइज के आलू खेत में ही पड़े रह गए। राजीव कुमार यादव व कोमल सिंह का कहना है कि खेती में नुकसान के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। किसानों की मदद को लेकर कोई भी सरकार चिंतित नहीं है। पक्ष हो या विपक्ष केवल भाषणबाजी कर रहे हैं। किसानों को राहत कैसे मिलेगी, इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। अब उनकी सरकार से यही मांग है कि उन्हें ढाई गुना लागत का दिया जाए।