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आलू ने तोड़ी किसानों की कमर

Mon, 25 Dec 2017 01:01 AM IST
कौशाम्बी ब्यूरो
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 आलू की नई फसल ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। खुदाई शुरू होते ही मंडी का रेट धड़ाम हो गया है। किसानों को प्रति बीघा दो हजार रुपए बचना भी मुश्किल हो रहा है। इसमें यदि किसान अपनी मेहनत जोड़ दे तो उसे दो तीन हजार रुपए प्रति बीघे घाटा सहना पड़ रहा है। बेबस किसान मजबूर होकर अपनी उपज को औने-पौने दामों में बेच रहा है।
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दोआबा के आलू किसान पिछले दो साल से चपत झेल रहे हैं। पिछले साल आलू का भाव सस्ता होने पर लगभग 30 हजार मीट्रिक टन आलू किसानों ने जिले के आठ कोल्ड स्टोरो में डंप कर लिया था। किसानों का मानना था कि वह कोल्ड स्टोर में जमा की गई आलू से मुनाफा कमाएंगे। जब आलू स्टोर से निकालने का समय आया तो भाव इतना गिर गया कि किराया भी नहीं अदा हो रहा था। इसके चलते किसानों ने अपना आलू कोल्ड स्टोर से निकालना मुनासिब नहीं समझा। इस घाटे को पूरा करने के लिए किसानों ने आलू की नई फसल की बुवाई लगभग सात हजार हेक्टेयर भूमि पर कर रखी है। दिसंबर माह का दूसरा पखवारा शुरू होते ही जिले के किसानों ने आलू की खुदाई शुरू कराई। जिले का आलू इलाहाबाद के मुंडेरा स्थित मंडी में पहुंचना शुरू हुआ तो भाव धड़ाम हो गया।

मौजूदा समय में किसानों का आलू पांच सौ रुपए कुंतल मंडी में खरीदा जा रहा है। प्रति बीघा 25 से 30 कुंतल निकल रहे आलू से किसानों को 15 हजार रुपए भी नहीं मिल पा रहा है। पांच सौ रुपए के भाव में आलू बेचने के बाद किसानों को लगभग पचास रुपया मंडी खर्च भी देना पड़ता है। इसके बाद उन्हें शुद्ध रकम 13 हजार रुपए मिल रही है। इसमें यदि किसान ढाई माह की गई अपनी मेहनत जोड़ दे तो उसे दो से तीन हजार रुपए कम से कम घाटा सहन करना पड़ रहा है। दो वर्ष से आलू घाटा सहन कर रहे किसानों की कमर टूट गई है। शासन-प्रशासन है कि घाटा खा रहे किसानों की समस्या को लेकर तनिक भी संजीदा
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ऐसे में किसानों होगी किसानों की दोगुना आय
मंझनपुर (ब्यूरो)। आलू की खेती करने वाले किसान दो वर्ष से लगातार घाटा उठा रहे हैं। इस घाटे से किसानों को उबारने के लिए कोई भी उपाय सूबे व केंद्र की सरकार नहीं कर पा रही है। दूसरी ओर शासन-प्रशासन के नुमाइंदे किसानों की आय दोगुना करने का दाम भर रहे हैं। वह किसानों के किसी भी कार्यक्रम में यह कहते नहीं थक रहे कि किसानों की आमदनी दोगुना की जाएगी। यहां पर सवाल यह उठ रहा है कि जब घाटा पूरा नहीं हो पा रहा है तो आय दोगुना कैसे की जा सकेगी या फिर घाटा उठा रहे किसानों की समस्या की जानकारी ही सरकार को नहीं हो रही है।
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