सरसंवा ब्लॉक के पचामा गांव की रामकुमारी की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने उनका नेत्रदान कर मानवता का संदेश दिया। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड चित्रकूट से पहुंचे नेत्र सर्जन डॉ. संदीप और उनकी टीम ने गांव पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
उन्होंने बताया कि नेत्रदान से क्रैटोकोनस, कैरेटाइटिस, मोतियाबिंद की जटिलताएं और अन्य नेत्र रोगों का उपचार संभव होता है। इस नेत्रदान से दूसरों की जिंदगी में उजाला आएगा। वर्तमान में भारत में 50 से 60 लाख लोगों को कॉर्निया की जरूरत है जबकि नेत्रदान करने वालों की संख्या बेहद कम है।