मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की ओपीडी के बाहर बैठे मरीज। फाइल
ठंड का असर अब लोगों की सुनने की क्षमता पर भी दिखाई देने लगा है। सर्दी में कान में हमिंग (भनभनाहट) की शिकायत लेकर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंड में फोन और ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल करने से कान पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे भनभनाहट की समस्या बढ़ जाती है।
चिकित्सकों के अनुसार, रोजाना 30-35 मरीजों इन्हीं बीमारियों से ग्रसित आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठंडी हवा के सीधे संपर्क, सर्दी-जुकाम, कान में संक्रमण और नमी के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। कई मामलों में लंबे समय तक ठंड में रहने से कान की नसों पर असर पड़ता है, जिससे भनभनाहट की शिकायत शुरू हो जाती है।
इसके अलावा रक्तचाप में उतार-चढ़ाव, तनाव और नींद की कमी भी इस परेशानी को बढ़ा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं में भी यह समस्या तेजी से सामने आ रही है।
कुछ मरीज ऐसे भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने समय रहते इलाज नहीं कराया, जिससे उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्रधर द्विवेदी ने लोगों को सलाह दी है कि सर्दी में कान को ढककर रखें, ठंडी हवा से बचें और सर्दी-जुकाम को हल्के में न लें।
तेज आवाज से दूरी बनाए रखें और मोबाइल या ईयरफोन का सीमित उपयोग करें। यदि कान में लगातार आवाज आ रही हो, सुनने में दिक्कत हो या चक्कर महसूस हों तो बिना देर किए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।