इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी कर्मचारी के वेतनमान का पुनर्निर्धारण कर उससे अधिक भुगतान की वसूली नहीं की जा सकती। न ही उसकी पेंशन में कटौती की जा सकती है।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने प्रयागराज निवासी बाबूराम की याचिका पर दिया। साथ ही प्रयागराज के रेलवे एसएसपी के सात जनवरी 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया। विभाग को निर्देश दिया कि याची की पेंशन का निर्धारण उसके अंतिम प्राप्त वेतन के आधार पर किया जाए।
याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि बाबूराम 31 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने एक जुलाई 2011 से उनका वेतनमान पुनर्निर्धारित कर अधिक भुगतान की वसूली शुरू कर दी। यह कार्रवाई बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए की गई। 2008 में विभागीय स्तर पर वेतन निर्धारण में त्रुटि हुई थी, जिसके लिए कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने सुशील कुमार सिंघल मामले का हवाला देते हुए कहा कि विभागीय गलती का दंड सेवानिवृत्त कर्मचारी को नहीं दिया जा सकता। ब्यूरो