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इमाम हुसैन की शहादत सच्चाई की मिसाल

Sun, 28 Dec 2014 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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करारी। इमाम हुसैन की कुर्बानी सच्चाई की मिसाल है। इंसानियत के लिए ही इमाम हुसैन ने खुद को शहीद किया है। करारी में शनिवार को आयोजित 18 ताबूत के जुलूस में तकरीर करते हुए यह बातें जगद्गुरु शंकराचार्य अधोक्षजानंद महाराज ने कही। इस दौरान उन्होंने हिंदू मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों से आपसी सौहार्द के साथ रहने का आह्वान किया। कहा कि धर्म के लिए किसी भी तरह की बुराइयों से समझौता करना ठीक नहीं है। इस दौरान मौलानाओं ने भी तकरीर पेश की। अकीदतमंदों ने शोज और मर्सिया पढ़ा। अंजुमनों ने सीनाजनी की।
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मुस्लिम यूथ कमेटी के तत्वावधान में शनिवार को खानदाने अबू तालिब के 18 जवानों के शहादत की याद में चमनगंज करारी स्थित चौधरी कादिर अली के अजाखाने से 18 ताबूतों का जुलूस निकाला गया। मौलाना मेहंदी हसन ने कुराने पाक से कार्यक्रम की शुरूआत की। मौलाना नसीम कर्रारवी ने सोज पढ़ा। मौलाना एजाज हसनैन, जमीर हैदर, जगराम हैदर ने तकरीर में इमाम हुसैन के शहादत की यादों को ताजा किया। रोशन कर्रारवी उर्फ नैयर रिजवी ने मर्सिया पढ़ा। इसमें अली असगर के शहादत की दास्तां को सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।

 आजमगढ़ की अंजुमने जकारिया ने सीनाजनी की। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आए जगद्गुरु शंकराचार्य अधोक्षजानंद जी महाराज ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत सच्चाई की मिसाल है। उन्होंने बुराइयों के सामने झुकने के बजाय शहीद होना मुनासिब समझा था। शंकराचार्य ने बुराइयों से धर्म का सौदा नहीं करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की अफवाह फैलाकर देश में आराजक तत्वों ने अशांति पैदा कर दी है।
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शंकराचार्य ने पेशावर में मासूम बच्चों के मौत की घटना की निंदा की। जुलूस डिप्टी जामिन हुसैन के अजाखाने के कर्बला में जियारत के लिए रखा गया। इस मौके पर मजिलिसी रिजवी, परवेज रिजवी,महताब मेंहदी, फुरकान रिजवी, जकी कादिर रिजवी, आमिर रिजवी, हैदर जामिन, कलीम रिजवी आदि मौजूद रहे।

जगद्गुरु शंकराचार्य अधोक्षजानंद जी महाराज शनिवार को तैयबापुर (शमसाबाद) गांव पहुंचकर अतहर हुसैन रिजवी (वैद्यजी) से मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टर याकूब अहमद, लल्लू सिंह, प्रधान रामसजीवन, दिलीप सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि दिलीप सिंह, मोहम्मद कासिम, नयाब खां, प्रधान रविशंकर, पूर्व प्रधान राजेश कुमार, मुन्ना सिंह, शहजादे आदि लोगों ने फूलमाला पहनाकर गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। इस दौरान शंकराचार्य ने हिंदू और मुस्लिम दोनों के लोगों से आपसी सौहार्द के साथ रहने का आह्वान किया।
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