भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव अब किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि यह मानव समाज की बड़ी बीमारी बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी रूप में मानसिक दबाव से जूझ रहा है। नौकरी का बोझ, बच्चों की महंगी पढ़ाई, आर्थिक अनिश्चितता और पारिवारिक कलह का दबाव आम आदमी को रोजमर्रा के तनाव का हिस्सा बना दिया है। अच्छी बात यह है कि तनाव से लड़ा जा सकता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कनैली के अधीक्षक डाॅ. मुक्तेश द्विवेदी बताते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बच्चे और युवाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले पिछले पांच साल में दोगुने हो गए हैं। युवा भविष्य को लेकर भयंकर तनाव में जी रहे हैं। परीक्षा, कोचिंग, प्रतियोगिता और सोशल मीडिया का दबाव उन्हें मानसिक तनाव बना रहा है। कई बच्चे अकेले में रोते हैं, लेकिन माता-पिता को पता ही नहीं चलता।
पहले लोग सोचते थे कि तनाव सिर्फ दिमाग की बात है, लेकिन शोध से यह पता चलता है कि तनाव शरीर को भी बीमार करता है। सिर दर्द होना, रात को नींद न आना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, हर समय थकान महसूस होना, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना और दिल की धड़कन तेज हो जाना... तनाव के ये शुरुआती लक्षण हैं। इन्हें नजरअंदाज करने से ब्रेन हैमरेज जैसी बड़ी बीमारी हो सकती है।
जीवनशैली में बदलाव से तनाव पर पाया जा सकता है काबू
तनाव को दूर करने के लिए दवा से ज्यादा जरूरी है जीवनशैली में बदलाव। रोज सुबह उठकर व्यायाम करने, टहलने और योग करने से काफी हद तक तनाव कम हो सकता है। इसके अलावा भोजन समय पर और संतुलित लें। रात को जल्दी सोने की आदत डालें। परिवार के साथ समय बिताएं, हंसे और बातें करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर और मनोचिकित्सक से सलाह लें।