निजी नलकूप संचालकों के पैसे से खरीदे गए क्लैंप उपभोक्ता को न देकर विभागीय लोग उसे कबाड़ में बेचकर मालामाल हो रहे हैं। क्लैंप सहित तमाम समान नहीं मिलने के कारण आए दिन स्टोर में उपभोक्ता और कर्मचारियों के बीच नोकझोंक हो रही है।
निजी नलकूप में बिजली का कनेक्शन करने के लिए संबंधित उपकेंद्र के अवर अभियंता द्वारा लाइन खींचने में आने वाले खर्च की प्राक्कलन रिपोर्ट तैयार करता है। जेई की रिपोर्ट के बाद उपभोक्ता को प्राक्कलन की रकम विभाग के डिवीजन कार्यालय में जमा करना होता है। इसके बाद वहां से कार्य स्वीकृति की रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर स्टोर से उपभोक्ता को विद्युत लाइन का समान दिया जाता है। प्राक्कलन रिपोर्ट में नट बोल्ट से लेकर क्लैंप और स्टे वायर तक का पैसा वसूला जाता है।
इसके बाद भी स्टोर से उपभोक्ता को क्लैंप, नट बोल्ट आदि नहीं दिया जाता है। शुक्रवार को बहादुर गांव से आए उपभोक्ता बाबाजी को भी स्टोर के कर्मचारियों ने नट बोल्ट और क्लैंप नहीं दिए। मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता से की गई है। एसडीओ स्टोर का कहना है कि उन्होंने कई बार एक्सईएन को पत्र लिखकर क्लैंप नहीं होने की जानकारी दी है। इसके बाद भी वह क्लैंप नहीं भेज रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब रकम जमा कराई जाती है तो समान जाता कहा हैं? विभागीय सूत्रों की मानें तो छोटे उपकरणों को विभागीय जिम्मेदार कबाड़ियों के हाथ बेच लेते हैं।
उपभोक्ता प्राक्कलन रिपोर्ट में दर्शाए गए सारे समान का पैसा डिविजन कार्यालय में जमा करता है। इसके बाद भी समान नहीं मुहैया कराया जाना गलत है। आगे से स्टोर में उपलब्ध समान का ही पैसा जमा कराने के लिए एक्सईएन को निर्देशित किया जाएगा। समान नहीं मिलने पर उपभोक्ता अपना पैसा वापस भी ले सकता है।
सुशील कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता