विधानसभा चुनाव नजदीक देख प्रदेश सरकार गरीबों पर मेहरबान हो गई है। दोआबा में इंदिरा और लोहिया आवास के लाभार्थियों को लेबर बजट का भुगतान न करना ग्राम विकास अधिकारी और बीडीओ को महंगा पड़ सकता है। सीडीओ ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी बीडीओ और ग्राम विकास अधिकारियों को मई के अंत तक शतप्रतिशत भुगतान का अल्टीमेटम दिया है।
शासन आवास के लाभार्थियों पर खासा मेहरबान है। आवास के साथ-साथ उन्हें 90 दिन की मजदूरी का भुगतान भी मनरेगा से किया जाना है। ऐसा इसलिए किया गया कि आवास निर्माण के दौरान लाभार्थी मजदूरी नहीं कर सकता। ऐसे में उसके पास भवन तो हो जाएगा पर खाने के लिए कुछ भी नहीं रहेगा। इसे देखते हुए शासन ने तीन माह की मजदूरी 174 रुपए प्रतिदिन की दर से देने का फरमान जारी किया है। शासन के फरमान के बाद भी दोआबा में बीडीओ और सेक्रेटरी शिथिलता बरत रहे हैं।
वित्तीय साल 15-16 में जिले के 3312 बीपीएल को इंदिरा और 743 पात्रों को लोहिया आवास की पहली किस्त आवंटित की गई है लेकिन एक भी लाभार्थी को अब तक लेबर बजट का भुगतान नहीं हो सका है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ओम प्रकाश आर्य ने शुक्रवार को सभी बीडीओ के साथ देर शाम तक बैठक की। बैठक में उन्होंने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि मई के अंत तक हर हाल में एक-एक लाभार्थी को 90 दिन के लेबर बजट का भुगतान हो जाना चाहिए। इसमे हीलाहवाली हुई तो संबंधित बीडीओ और सेक्रेटरी के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी जाएगी। सीडीओ के अल्टीमेटम से मातहतों में लेबर बजट भुगतान को लेकर हड़कंप रहा।
वित्तीय वर्ष 15-16 के लोहिया और इंदिरा आवास के लाभार्थियों को द्वितीय किस्त नहीं भेजी जा सकी है। इसके चलते 3312 इंदिरा और 743 लोहिया के लाभार्थियों का आवास निर्माण अधर में लटका है। इस मामले को मुख्य विकास अधिकारी ने गंभीरता से लिया। उन्होंने शुक्रवार की देर शाम तक चली बैठक में सभी बीडीओ को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लाभार्थियों के आवास छत लेबल तक निर्मित हो चुके हैं। उन्हें दूसरी किस्त देने के लिए हर हाल में डिमांड बनाकर भेजे। सप्ताह भर के भी ऐसे लाभार्थियों के खाते में आवास की दूसरी किस्त पहुंच जानी चाहिए।
दोआबा में गंगा की तराई में बसे 33 गांवों का चयन गंगा एक्शन प्लान के तहत किया गया था। इन गांवों की गंदगी नालों के सहारे गंगा में न जाए इसके लिए पिछले साल कार्ययोजना तैयार की गई थी। गांवों का चयन होने के बाद यहां पर व्यक्तिगत और सामूहिक शौचालयों का निर्माण बड़े पैमाने पर कराने के लिए पंचायती राज विभाग को धनराशि भेजी गई थी। चयनित गांवों को भेजी गई रकम से अब तक गंगा एक्शन प्लान के तहत क्या-क्या कराया गया इसकी समीक्षा शुक्रवार को मुख्य सचिव पंचायती राज ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए की। इस दौरान उन्होंने जरूरी निर्देश भी डीपीआरओ को दिया।