मंझनपुर। सीबीएसई के स्कूलों में अब शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में कक्षा छह के बाद से ही कौशल आधारित कोर्स का संचालन होगा। सीबीएसई ने स्कूल शिक्षा में स्किल एजुकेशन को अनिवार्य रूप से शामिल किया है। इससे छात्रों को भविष्य में कौशल के दम पर चुनौती से निपटने में आसानी होगी। इसके लिए कौशल विकास प्रयोगशाला स्थापित होंगी।
सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्किल एजुकेशन शुरू किया है। इसमें कक्षा छह से 12 तक के छात्रों के लिए अलग से माड्यूल्स तैयार किया गया है। छात्र उससे अधिक माड्यूल चुनकर अपने को तैयार कर सकता है। यह पूरी तरह से प्रोजेक्ट आधारित होगा। इसी के आधार पर इनका मूल्यांकन भी होगा। कक्षा 9-10 में 22 व कक्षा 11-12 में 43 स्किल विषय होंगे। इनके लिए बच्चों से कोई शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।
अगले तीन साल में योजना पूरी तरह से स्कूलों में लागू हो जाएगी। पहले चारण में जवाहर नवोदय और केंद्रीय विद्यालय में व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए स्कूलों की व्यवस्था को डिजिटल करने के साथ ही स्मार्ट कक्षाओं का निर्माण किया जा चुका है।
कौशल में सुधार व जरूरत के अनुसार जानकारी देने के लिए जिला स्तर पर जिला कौशल समन्वयक (डीएससी) की तैनाती होगी। जुलाई तक यह तैनाती होने की संभावना है। साथ ही स्कूलों के प्राचार्य व शिक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जवाहर नवोदय विद्यालय टेवां के प्राचार्य एके श्रीवास्तव ने बताया कि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव के लिए स्किल एक्सपो, कॅरिअर गाइडेंस, हैकाथन, बूटकैंप, ओलंपियाड और इंडस्ट्री एंगेजमेंट कार्यक्रम का आयोजन होगा। कौशल विकास के पाठ्यक्रमों को लागू करने की विद्यालय में तैयारी पूरी की जा चुकी है।